Divyayogashop Blog

 March 3, 2024 

महाशिवरात्रि के दिन न करने चाहिए ये 10 बातें:

  1. कड़ी मेहनत करना: श्रम और उत्तेजना से दूर रहें।
  2. अशुद्ध भोजन: मांस, मद्य, विष्ठा, अजवायन, लहसुन, प्याज, मसालेदार खाद्य पदार्थ न खाएं।
  3. अहिंसा का उल्लंघन: किसी भी प्राणी को हानि न पहुंचाएं।
  4. क्रोध और अशांति: क्रोध और अशांति से दूर रहें।
  5. अनुचित विचारधारा: अनुचित विचारों में प्रवृत्त न हों।
  6. अधर्मिक कार्य: अधर्मिक कार्यों से बचें।
  7. नकारात्मकता: नकारात्मक विचारों का त्याग करें।
  8. व्यर्थ चर्चा: व्यर्थ चर्चा और बहस से दूर रहें।
  9. अध्यात्मिक नींव पर ध्यान: आध्यात्मिक नींव पर ध्यान केंद्रित करें।
  10. अनियमितता: अनियमित और अनुशासनहीन आचरण से बचें।

 March 3, 2024 

सब पर कृपा करने वाला दिन महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो भगवान शिव को समर्पित है। यह त्योहार हर साल फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है।

Maha shivaratri pujan Booking

महाशिवरात्रि का महत्व:

  • महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का दिन माना जाता है।
  • महाशिवरात्रि को भगवान शिव के अग्निलिंग स्वरूप के प्रकट होने का दिन भी माना जाता है।
  • महाशिवरात्रि को आध्यात्मिक रूप से जागृत होने और मोक्ष प्राप्त करने का दिन माना जाता है।

महाशिवरात्रि का उत्सव:

  • महाशिवरात्रि के दिन भक्त भगवान शिव का व्रत रखते हैं और उनका पूजन करते हैं।
  • महाशिवरात्रि के दिन भक्त भगवान शिव को जल, दूध, बेल पत्र, धतूरा, और चंदन अर्पित करते हैं।
  • महाशिवरात्रि के दिन भक्त रात भर जागरण करते हैं और भगवान शिव के भजन गाते हैं।

महाशिवरात्रि के लाभ:

  • महाशिवरात्रि का व्रत रखने से भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
  • महाशिवरात्रि का व्रत रखने से भक्तों के पापों का नाश होता है।
  • महाशिवरात्रि का व्रत रखने से भक्तों को सुख, समृद्धि, और मोक्ष प्राप्त होता है।

महाशिवरात्रि एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जो भगवान शिव को समर्पित है। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से जागृत होने और मोक्ष प्राप्त करने का एक अवसर प्रदान करता है।

 January 11, 2024 

शत्रु नजर बाधा दूर करने के लिये इस कामख्या चालीसा का मंगलवार से पाठ करना चाहिये

सुमिरन कामाख्या करुँ, सकल सिद्धि की खानि ।

होइ प्रसन्न सत करहु माँ, जो मैं कहौं बखानि ॥

जै जै कामाख्या महारानी । दात्री सब सुख सिद्धि भवानी ॥

कामरुप है वास तुम्हारो । जहँ ते मन नहिं टरत है टारो ॥

ऊँचे गिरि पर करहुँ निवासा । पुरवहु सदा भगत मन आसा ।

ऋद्धि सिद्धि तुरतै मिलि जाई । जो जन ध्यान धरै मनलाई ॥

जो देवी का दर्शन चाहे । हदय बीच याही अवगाहे ॥

प्रेम सहित पंडित बुलवावे । शुभ मुहूर्त निश्चित विचारवे ॥

अपने गुरु से आज्ञा लेकर । यात्रा विधान करे निश्चय धर ।

पूजन गौरि गणेश करावे । नान्दीमुख भी श्राद्ध जिमावे ॥

शुक्र को बाँयें व पाछे कर । गुरु अरु शुक्र उचित रहने पर ॥

जब सब ग्रह होवें अनुकूला । गुरु पितु मातु आदि सब हूला ॥

नौ ब्राह्मण बुलवाय जिमावे । आशीर्वाद जब उनसे पावे ॥

सबहिं प्रकार शकुन शुभ होई । यात्रा तबहिं करे सुख होई ॥

जो चह सिद्धि करन कछु भाई । मंत्र लेइ देवी कहँ जाई ॥

आदर पूर्वक गुरु बुलावे । मन्त्र लेन हित दिन ठहरावे ॥

शुभ मुहूर्त में दीक्षा लेवे । प्रसन्न होई दक्षिणा देवै ॥

ॐ का नमः करे उच्चारण । मातृका न्यास करे सिर धारण ॥

षडङ्ग न्यास करे सो भाई । माँ कामाक्षा धर उर लाई ॥

देवी मन्त्र करे मन सुमिरन । सन्मुख मुद्रा करे प्रदर्शन ॥

जिससे होई प्रसन्न भवानी । मन चाहत वर देवे आनी ॥

जबहिं भगत दीक्षित होइ जाई । दान देय ऋत्विज कहँ जाई ॥

विप्रबंधु भोजन करवावे । विप्र नारि कन्या जिमवावे ॥

दीन अनाथ दरिद्र बुलावे । धन की कृपणता नहीं दिखावे ॥

एहि विधि समझ कृतारथ होवे । गुरु मन्त्र नित जप कर सोवे ॥

देवी चरण का बने पुजारी । एहि ते धरम न है कोई भारी ॥

सकल ऋद्धि – सिद्धि मिल जावे । जो देवी का ध्यान लगावे ॥

तू ही दुर्गा तू ही काली । माँग में सोहे मातु के लाली ॥

वाक् सरस्वती विद्या गौरी । मातु के सोहैं सिर पर मौरी ॥

क्षुधा, दुरत्यया, निद्रा तृष्णा । तन का रंग है मातु का कृष्णा ।

कामधेनु सुभगा और सुन्दरी । मातु अँगुलिया में है मुंदरी ॥

कालरात्रि वेदगर्भा धीश्वरि । कंठमाल माता ने ले धरि ॥

तृषा सती एक वीरा अक्षरा । देह तजी जानु रही नश्वरा ॥

स्वरा महा श्री चण्डी । मातु न जाना जो रहे पाखण्डी ॥

महामारी भारती आर्या । शिवजी की ओ रहीं भार्या ॥

पद्मा, कमला, लक्ष्मी, शिवा । तेज मातु तन जैसे दिवा ॥

उमा, जयी, ब्राह्मी भाषा । पुर हिं भगतन की अभिलाषा ॥

रजस्वला जब रुप दिखावे । देवता सकल पर्वतहिं जावें ॥

रुप गौरि धरि करहिं निवासा । जब लग होइ न तेज प्रकाशा ॥

एहि ते सिद्ध पीठ कहलाई । जउन चहै जन सो होई जाई ॥

जो जन यह चालीसा गावे । सब सुख भोग देवि पद पावे ॥

होहिं प्रसन्न महेश भवानी । कृपा करहु निज – जन असवानी ॥

॥ दोहा ॥

कर्हे गोपाल सुमिर मन, कामाख्या सुख खानि ।

जग हित माँ प्रगटत भई, सके न कोऊ खानि ॥

 January 4, 2024 

भगवान कुबेर चालीसा का पाठ किसी भी गुरुवार या शुक्रवार से नियमित ३/५/७/११ पाठ करे व जीवन मे धन सुख ऐश्वर्य पाये.

॥ दोहा॥ 

जैसे अटल हिमालय और जैसे अडिग सुमेर ।

ऐसे ही स्वर्ग द्वार पै, अविचल खड़े कुबेर 

॥ विघ्न हरण मंगल करण, सुनो शरणागत की टेर ।

भक्त हेतु वितरण करो, धन माया के ढ़ेर ॥ 

॥ चौपाई ॥ 

जय जय जय श्री कुबेर भण्डारी ।
धन माया के तुम अधिकारी ॥ तप तेज पुंज निर्भय भय हारी ।
पवन वेग सम सम तनु बलधारी ॥ स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी ।
सेवक इंद्र देव के आज्ञाकारी ॥ यक्ष यक्षणी की है सेना भारी ।
सेनापति बने युद्ध में धनुधारी ॥ महा योद्धा बन शस्त्र धारैं ।
युद्ध करैं शत्रु को मारैं ॥ सदा विजयी कभी ना हारैं ।
भगत जनों के संकट टारैं ॥ प्रपितामह हैं स्वयं विधाता ।
पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता ॥ विश्रवा पिता इडविडा जी माता ।
विभीषण भगत आपके भ्राता ॥ शिव चरणों में जब ध्यान लगाया ।
घोर तपस्या करी तन को सुखाया ॥ शिव वरदान मिले देवत्य पाया ।
अमृत पान करी अमर हुई काया ॥ धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में ।
देवी देवता सब फिरैं साथ में ।
पीताम्बर वस्त्र पहने गात में ॥
बल शक्ति पूरी यक्ष जात में ॥ स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं ।
त्रिशूल गदा हाथ में साजैं ॥ शंख मृदंग नगारे बाजैं ।
गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं ॥ चौंसठ योगनी मंगल गावैं ।
ऋद्धि सिद्धि नित भोग लगावैं ॥ दास दासनी सिर छत्र फिरावैं ।
यक्ष यक्षणी मिल चंवर ढूलावैं ॥ ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं ।
देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं ॥ पुरुषोंमें जैसे भीम बली हैं ।
यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं ॥ भगतों में जैसे प्रहलाद बड़े हैं ।
पक्षियों में जैसे गरुड़ बड़े हैं ॥ नागों में जैसे शेष बड़े हैं ।
वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं ॥ कांधे धनुष हाथ में भाला ।
गले फूलों की पहनी माला ॥ स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला ।
दूर दूर तक होए उजाला ॥ कुबेर देव को जो मन में धारे ।
सदा विजय हो कभी न हारे ।।
बिगड़े काम बन जाएं सारे ।
अन्न धन के रहें भरे भण्डारे ॥ कुबेर गरीब को आप उभारैं ।
कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं ॥ कुबेर भगत के संकट टारैं ।
कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं ॥ शीघ्र धनी जो होना चाहे ।
क्युं नहीं यक्ष कुबेर मनाएं ॥ यह पाठ जो पढ़े पढ़ाएं ।
दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं ॥ भूत प्रेत को कुबेर भगावैं ।
अड़े काम को कुबेर बनावैं ॥ रोग शोक को कुबेर नशावैं ।
कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं ॥ कुबेर चढ़े को और चढ़ादे ।
कुबेर गिरे को पुन: उठा दे ॥ कुबेर भाग्य को तुरंत जगा दे ।
कुबेर भूले को राह बता दे ॥ प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे ।
भूखे की भूख कुबेर मिटा दे ॥ रोगी का रोग कुबेर घटा दे ।
दुखिया का दुख कुबेर छुटा दे ॥ बांझ की गोद कुबेर भरा दे ।
कारोबार को कुबेर बढ़ा दे ॥ कारागार से कुबेर छुड़ा दे ।
चोर ठगों से कुबेर बचा दे ॥ कोर्ट केस में कुबेर जितावै ।
जो कुबेर को मन में ध्यावै ॥ चुनाव में जीत कुबेर करावैं ।
मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं ॥ पाठ करे जो नित मन लाई ।
उसकी कला हो सदा सवाई ॥ जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई ।
उसका जीवन चले सुखदाई ॥ जो कुबेर का पाठ करावै ।
उसका बेड़ा पार लगावै ॥ उजड़े घर को पुन: बसावै ।
शत्रु को भी मित्र बनावै ॥ सहस्त्र पुस्तक जो दान कराई ।
सब सुख भोद पदार्थ पाई ॥ प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई ।
मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई ॥ 

॥ दोहा ॥ 

शिव भक्तों में अग्रणी, श्री यक्षराज कुबेर ।
हृदय में ज्ञान प्रकाश भर, कर दो दूर अंधेर 

॥ कर दो दूर अंधेर अब, जरा करो ना देर ।
शरण पड़ा हूं आपकी, दया की दृष्टि फेर । 

॥ इति श्री कुबेर चालीसा ॥