Posts by Divyayoga Shop

 July 24, 2021 

बजरंग बाण

नियमित बजरंग बाण का पाठ करने से बिगडे काम बनने शुरु हो जाते है.इस पाठ से ग्रह दोष, विवाह बाधा, कारागार का भय, साढे-साती, बिमारी का भय, नौकरी का भय, वास्तु दोष नष्ट होना शुरु हो जाता है

चौपाई :
जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥
जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥
बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥
जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥
जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥
यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥

दोहा :
उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥

 July 22, 2021 

शिव चालीसा पाठ

ये शिव चालीसा का पाठ जो नियमित रूप से करता उसके जीवन किसी भी प्रकार की कमी नही होती. पारिवारिक- विवाहित व आर्थिक जीवन सुखमय हो जाता है.

श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥


॥दोहा॥


नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

 July 22, 2021 

गौरी (पार्वती) चालीसा

माता गौरी चालीसा पाठ नियमित करने से 

मन मंदिर मेरे आन बसो,

आरम्भ करूं गुणगान,

गौरी माँ मातेश्वरी,

दो चरणों का ध्यान।


पूजन विधी न जानती,

पर श्रद्धा है आपर,

प्रणाम मेरा स्विकारिये,

हे माँ प्राण आधार।




नमो नमो हे गौरी माता,

आप हो मेरी भाग्य विधाता,

शरनागत न कभी गभराता,

गौरी उमा शंकरी माता।


आपका प्रिय है आदर पाता,

जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,

महादेव गणपति संग आओ,

मेरे सकल कलेश मिटाओ।


सार्थक हो जाए जग में जीना,

सत्कर्मो से कभी हटु ना,

सकल मनोरथ पूर्ण कीजो,

सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।


हे माँ भाग्य रेखा जगा दो,

मन भावन सुयोग मिला दो,

मन को भाए वो वर चाहु,

ससुराल पक्ष का स्नेहा मै पायु।


परम आराध्या आप हो मेरी,

फ़िर क्यूं वर मे इतनी देरी,

हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो,

थोडे में बरकत भर दीजियो।


अपनी दया बनाए रखना,

भक्ति भाव जगाये रखना,

गौरी माता अनसन रहना,

कभी न खोयूं मन का चैना।


देव मुनि सब शीश नवाते,

सुख सुविधा को वर मै पाते,

श्रद्धा भाव जो ले कर आया,

बिन मांगे भी सब कुछ पाया।


हर संकट से उसे उबारा,

आगे बढ़ के दिया सहारा,

जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे,

निराश मन मे आस जगावे।


शिव भी आपका काहा ना टाले,

दया द्रष्टि हम पे डाले,

जो जन करता आपका ध्यान,

जग मे पाए मान सम्मान।


सच्चे मन जो सुमिरन करती,

उसके सुहाग की रक्षा करती,

दया द्रष्टि जब माँ डाले,

भव सागर से पार उतारे।


जपे जो ओम नमः शिवाय,

शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,

जिसपे आप दया दिखावे,

दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।


सता गुन की हो दता आप,

हर इक मन की ग्याता आप,

काटो हमरे सकल कलेश,

निरोग रहे परिवार हमेश।


दुख संताप मिटा देना माँ,

मेघ दया के बरसा देना माँ,

जबही आप मौज में आय,

हठ जय माँ सब विपदाए।


जीसपे दयाल हो माता आप,

उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,

फल-फूल मै दुग्ध चढ़ाऊ,

श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।


अवगुन मेरे ढक देना माँ,

ममता आँचल कर देना माँ,

कठिन नहीं कुछ आपको माता,

जग ठुकराया दया को पाता।


बिन पाऊ न गुन माँ तेरे,

नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,

जितने आपके पावन धाम,

सब धामो को माँ प्राणम।


आपकी दया का है ना पार,

तभी को पूजे कुल संसार,

निर्मल मन जो शरण मे आता,

मुक्ति की वो युक्ति पाता।


संतोष धन्न से दामन भर दो,

असम्भव को माँ सम्भव कर दो,

आपकी दया के भारे,

सुखी बसे मेरा परिवार।


अपकी महिमा अती निराली,

भक्तो के दुःख हरने वाली,

मनो कामना पुरन करती,

मन की दुविधा पल मे हरती।


चालीसा जो भी पढे-सुनाया,

सुयोग वर् वरदान मे पाए,

आशा पूर्ण कर देना माँ,

सुमंगल साखी वर देना माँ।


गौरी माँ विनती करूँ,

आना आपके द्वार,

ऐसी माँ कृपा किजिये,

हो जाए उद्धहार।


हीं हीं हीं शरण मे,

दो चरणों का ध्यान,

ऐसी माँ कृपा कीजिये,

पाऊँ मान सम्मान।


जय माँ गौरी (पार्वती)

 July 21, 2021 

काली चालीसा पाठ

माता काली चालीसा का पाठ नियमित रूप से करने पर सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होकर तंत्र भय, शत्रु भय नष्ट हो जाते है.

॥ दोहा ॥

जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार ।
महिष मर्दिनी कालिका , देहु अभय अपार ॥

॥ चौपाई ॥

रि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥
अष्टभुजी सुखदायक माता । दुष्टदलन जग में विख्याता ॥
भाल विशाल मुकुट छवि छाजै । कर में शीश शत्रु का साजै ॥
दूजे हाथ लिए मधु प्याला । हाथ तीसरे सोहत भाला ॥
चौथे खप्पर खड्ग कर पांचे । छठे त्रिशूल शत्रु बल जांचे ॥
सप्तम करदमकत असि प्यारी । शोभा अद्भुत मात तुम्हारी ॥
अष्टम कर भक्तन वर दाता । जग मनहरण रूप ये माता ॥
भक्तन में अनुरक्त भवानी । निशदिन रटें ॠषी-मुनि ज्ञानी ॥
महशक्ति अति प्रबल पुनीता । तू ही काली तू ही सीता ॥
पतित तारिणी हे जग पालक । कल्याणी पापी कुल घालक ॥
शेष सुरेश न पावत पारा । गौरी रूप धर्यो इक बारा ॥
तुम समान दाता नहिं दूजा । विधिवत करें भक्तजन पूजा ॥
रूप भयंकर जब तुम धारा । दुष्टदलन कीन्हेहु संहारा ॥
नाम अनेकन मात तुम्हारे । भक्तजनों के संकट टारे ॥
कलि के कष्ट कलेशन हरनी । भव भय मोचन मंगल करनी ॥
महिमा अगम वेद यश गावैं । नारद शारद पार न पावैं ॥
भू पर भार बढ्यौ जब भारी । तब तब तुम प्रकटीं महतारी ॥
आदि अनादि अभय वरदाता । विश्वविदित भव संकट त्राता ॥
कुसमय नाम तुम्हारौ लीन्हा । उसको सदा अभय वर दीन्हा ॥
ध्यान धरें श्रुति शेष सुरेशा । काल रूप लखि तुमरो भेषा ॥
कलुआ भैंरों संग तुम्हारे । अरि हित रूप भयानक धारे ॥
सेवक लांगुर रहत अगारी । चौसठ जोगन आज्ञाकारी ॥
त्रेता में रघुवर हित आई । दशकंधर की सैन नसाई ॥
खेला रण का खेल निराला । भरा मांस-मज्जा से प्याला ॥
रौद्र रूप लखि दानव भागे । कियौ गवन भवन निज त्यागे ॥
तब ऐसौ तामस चढ़ आयो । स्वजन विजन को भेद भुलायो ॥
ये बालक लखि शंकर आए । राह रोक चरनन में धाए ॥
तब मुख जीभ निकर जो आई । यही रूप प्रचलित है माई ॥
बाढ्यो महिषासुर मद भारी । पीड़ित किए सकल नर-नारी ॥
करूण पुकार सुनी भक्तन की । पीर मिटावन हित जन-जन की ॥
तब प्रगटी निज सैन समेता । नाम पड़ा मां महिष विजेता ॥
शुंभ निशुंभ हने छन माहीं । तुम सम जग दूसर कोउ नाहीं ॥
मान मथनहारी खल दल के । सदा सहायक भक्त विकल के ॥
दीन विहीन करैं नित सेवा । पावैं मनवांछित फल मेवा ॥
संकट में जो सुमिरन करहीं । उनके कष्ट मातु तुम हरहीं ॥
प्रेम सहित जो कीरति गावैं । भव बन्धन सों मुक्ती पावैं ॥
काली चालीसा जो पढ़हीं । स्वर्गलोक बिनु बंधन चढ़हीं ॥
दया दृष्टि हेरौ जगदम्बा । केहि कारण मां कियौ विलम्बा ॥
करहु मातु भक्तन रखवाली । जयति जयति काली कंकाली ॥
सेवक दीन अनाथ अनारी । भक्तिभाव युति शरण तुम्हारी ॥

॥ दोहा ॥

प्रेम सहित जो करे, काली चालीसा पाठ ।
तिनकी पूरन कामना, होय सकल जग ठाठ ॥

 July 16, 2021 

॥कामख्या स्त्रोत॥

इसका नियमित पाठ करे और जीवन की सभी समस्याये, बाधाये, नजर, ब्लैकमैजिक शत्रु बाधा को नष्ट करे

जय कामेशि चामुण्डे जय भूतापहारिणि ।
जय सर्वगते देवि कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
विश्वमूर्ते शुभे शुद्धे विरुपाक्षि त्रिलोचने ।
भीमरुपे शिवे विद्ये कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
मालाजये जये जम्भे भूताक्षि क्षुभितेऽक्षये ।
महामाये महेशानि कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
कालि कराल विक्रान्ते कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
कालि कराल विक्रान्ते कामेश्वरि हरप्रिये ।
सर्व्वशास्त्रसारभूते कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
कामरुप – प्रदीपे च नीलकूट – निवासिनि ।
निशुम्भ – शुम्भमथनि कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
कामाख्ये कामरुपस्थे कामेश्वरि हरिप्रिये ।
कामनां देहि में नित्यं कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
वपानाढ्यवक्त्रे त्रिभुवनेश्वरि ।
महिषासुरवधे देवि कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
छागतुष्टे महाभीमे कामख्ये सुरवन्दिते ।
जय कामप्रदे तुष्टे कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
भ्रष्टराज्यो यदा राजा नवम्यां नियतः शुचिः ।
अष्टम्याच्च चतुदर्दश्यामुपवासी नरोत्तमः ॥
संवत्सरेण लभते राज्यं निष्कण्टकं पुनः ।
य इदं श्रृणुवादभक्त्या तव देवि समुदभवम् ॥
सर्वपापविनिर्म्मुक्तः परं निर्वाणमृच्छति ।
श्रीकामरुपेश्वरि भास्करप्रभे, प्रकाशिताम्भोजनिभायतानने ।
सुरारि – रक्षः – स्तुतिपातनोत्सुके, त्रयीमये देवनुते नमामि ॥
सितसिते रक्तपिशङ्गविग्रहे, रुपाणि यस्याः प्रतिभान्ति तानि ।
विकाररुपा च विकल्पितानि, शुभाशुभानामपि तां नमामि ॥
कामरुपसमुदभूते कामपीठावतंसके ।
विश्वाधारे महामाये कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
अव्यक्त विग्रहे शान्ते सन्तते कामरुपिणि ।
कालगम्ये परे शान्ते कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
या सुष्मुनान्तरालस्था चिन्त्यते ज्योतिरुपिणी ।
प्रणतोऽस्मि परां वीरां कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
दंष्ट्राकरालवदने मुण्डमालोपशोभिते ।
सर्व्वतः सर्वंव्गे देवि कामेश्वरि नमोस्तु ते ॥
चामुण्डे च महाकालि कालि कपाल – हारिणी ।
पाशहस्ते दण्डहस्ते कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
चामुण्डे कुलमालास्ये तीक्ष्णदंष्ट्र महाबले ।
शवयानस्थिते देवि कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥

 March 30, 2021 

शिवानंद दास जी के मार्गदर्शन मे

दत्त गुरु साधना शिविर- वज्रेश्वरी

DATTATREY (DATTA GURU) SADHANA SHIVIR VAJRESHVARi

(Sat+Sun) 10-11 April. 2021 at Vajreshwari near mumbai.

Lord Dutt Guru (Dattatreya) is also believed to provide all kinds of security, happiness, prosperity and desire for success in Sabar Sadhana. It is said that any wish of his worshiper is definitely fulfilled.

Their worship would have protected the house, office, shop, business, job security, enemy, evileye and blackmagic. Also Court-court, disputes, conspiracy, government bottlenecks begin to be destroyed.

In this shivir, there will be a ritual of chanting from 125000 to 550000. Taking part in it is no less fortunate. Therefore, one must definitely get experience by participating in this camp!

भगवान दत्त गुरु (दत्तात्रेय) हर तरह की सुरक्षा, सुख समृद्धि व मनोकामना के साथ साबर साधना मे सिद्धि देने वाले भी माने जाते है. कहते है कि किसी भी तरह की मनोकामना हो इनके उपासक की इच्छा अवश्य पूर्ण होती है. इनकी उपसना से घर, ऑफिस, दुकान, ब्यापार, नौकरी की सुरक्षा, शत्रु, तंत्र व ब्लैकमैजिक से सुरक्षा होती. कोर्ट-्कचहरी, वाद विवाद, षडयंत्र, सरकारी अडचने नष्ट होने लगती है.

इस शिविर मे १२५००० से लेकर ५५०००० तक जप हवन का अनुष्ठान होगा. इसमे भाग लेना किसी सौभाग्य से कम नही है. इसलिये एक बार अवश्य जरूर इस शिविर मे भाग लेकर अनुभव जरूर प्राप्त करे!

DATTA GURU SADHANA SHIVIR BOOKING

Shivir Location- https://goo.gl/maps/AWUTZNAyjky

Fees 8000/- Including- Sadhana samagri (Siddha Dattaguru Yantra, Siddha Dattaguru mala, Siddha Dattaguru parad gutika, Ashta-bhairav asan, Siddha Chirmi beads, Gomati chakra, Tantrokta nariyal, siddha kaudi, Siddha Rakshasutra and more.) + Dattaguru Diksha by Guruji+ Room Stay with Complementary Breakfast, Lunch, Dinner. (Husband-wife 12000/-) (Pay 1000/- booking and balance pay on shivir)

Call for booking-91 7710812329/ 91 9702222903

 March 14, 2021 

पित्र दोष निवारण पूजन शिविर

Pitra Dosha Nivaran Pujan Shivir

(Amavasya) 10th June. 2021 at Vajreshwari near mumbai.

If you suffer from problems of marriage, children, Jealousy, Blackmagic. The parent is sick or separated, the work is not completed on time, or there is a problem in the work. Friends are becoming enemies, family is in trouble, so it means that you have may be Pitra dosha. If there is any constellation in your horoscope, Ashlesha, Magha, Revathi, Mool, and Jyeshtha Nakshatra, then it means you have Pitra Dosh. Then your friends also become enemies. So you have to get the Pitra Dosha Pooja done.

Participating physically or participating online (proxy) is no less fortunate. Therefore, one must definitely get experience by this shivir!

अगर आप विवाह, संतान की समस्या, नजर, तंत्र बाधा से ग्रस्त है. माता पिता बिमार है या अलग हो चुके है, कार्य समय पर पूरा नही हो पा रहा है, या कार्य मे अडचन आ रही है. मित्र दुश्मन बन रहे, परिवार मे क्लेश है तो इसका मतलब यह है कि कही आपको पित्र दोष तो नही है? अगर आपकी कुंडली मे अश्लेषा, मघा, रेवती, मूल, व ज्येष्ठा नक्षत्र मे से कोई एक नक्षत्र है, तो इसका मतलब आपको पित्र दोष लगा हुआ है. तब आपके मित्र भी शत्रु बन जाते है. तब आपको पित्र दोष निवारण पूजा करवानी ही होगी.

इस मे भाग लेना या ऑनलाईन भाग लेना किसी सौभाग्य से कम नही है. इसलिये एक बार अवश्य जरूर इस शिविर मे भाग लेकर अनुभव जरूर प्राप्त करे!

PITRA DOSHA NIVARAN PUJAN BOOKING

Shivir Location- https://goo.gl/maps/AWUTZNAyjky

Call for booking-91 7710812329/ 91 9702222903

 March 14, 2021 

शिवानंद दास जी के मार्गदर्शन मे

अष्ट भैरव साधना शिविर- वज्रेश्वरी

ASHTA-BHAIRAV SADHANA SHIVIR

(Sat+Sun) 27-28 March. 2021 at Vajreshwari near mumbai.

Lord Ashta Bhairava is considered to be the god who gives all kinds of protection and success to the journey, no goddess is pleased without his grace. Their worship would have protected the house, office, shop, business, job security, enemy, evileye and blackmagic. Also Court-court, disputes, conspiracy, government bottlenecks begin to be destroyed.

भगवान अष्ट भैरव हर तरह की सुरक्षा व यात्रा को सफलता देने वाले देवता माने जाते है, इनकी कृपा के बिना कोई भी देवी प्रसन्न नही होती. इनकी उपसना से घर, ऑफिस, दुकान, ब्यापार, नौकरी की सुरक्षा, शत्रु, तंत्र व ब्लैकमैजिक से सुरक्षा होती. कोर्ट-्कचहरी, वाद विवाद, षडयंत्र,सरकारी अडचने नष्ट होने लगती है.

इस शिविर मे १२५००० से लेकर ५५०००० तक जप हवन का अनुष्ठान होगा. इसमे भाग लेना किसी सौभाग्य से कम नही है. इसलिये एक बार अवश्य जरूर इस शिविर मे भाग लेकर अनुभव जरूर प्राप्त करे!

ASHTA-BHAIRAV SADHANA SHIVIR BOOKING

Shivir Location- https://goo.gl/maps/AWUTZNAyjky

Fees 8000/- Including- Sadhana samagri (Siddha Ashta-bhairav Yantra, Siddha Ashta-bhairav mala, Siddha Ashta-bhairav parad gutika, Ashta-bhairav asan, Siddha Chirmi beads, Gomati chakra, Tantrokta nariyal, siddha kaudi, Siddha Rakshasutra and more.) + Ashta-bhairav Diksha by Guruji+ Room Stay with Complementary Breakfast, Lunch, Dinner. (Husband-wife 12000/-) (Pay 1000/- booking and balance pay on shivir)

Call for booking-91 7710812329/ 91 9702222903

 February 15, 2021 

MAHASHIVRATRI PUJAN

11th March 2021, at Vajreshwari

Every month, the small Shivaratri falls on the Trayodashi of Krishna Paksha, but the coming Shivaratri on the Thrayodashi of the Krishna Paksha of Phalgun month is called Maha Shivaratri. This Mahashivratri, which comes once a year, is very auspicious and fulfills wishes. On this day, all the defects coming in the horoscope are removed, such as .. Kalsarp Dosh, Chandal Dosh, Grahan Dosh, Venom Dosh, Manglik Dosh etc. 

Without this......

  • There is a benefit in marriage, engagement and other mangalik work.
  • Get rid of tantra badha
  • Enemies keep calm
  • Protection from evil/sprit/ghost.
  • Business obstacles
  • Job, interview benefits
  • Disputes calm down
  • Family Disputes begin to calm down
  • Peace between husband-wife
  • Talented child is obtained
  • Bad behavior of children starts removing
  • Immunity begins to increase

BOOK MAHA SHIVARATRI PUJA SHIVIR

In this worship camp, secret Pashupat Puja is being performed with Rudrabhishek, which is considered to be of high power. Only fortunate people are able to participate in such a worship camp, if for some reason you are unable to attend the camp, then you can also participate online (proxy).

Call:- 7710812329

हर महीना कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को छोटी शिवरात्री आती है, लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को आने वाली शिवरात्री महाशिवरात्री कहलाती है. वर्ष मे एक बार आने वाली यह महाशिवरात्री बहुत ही शुभ व मनोकामनाओ की पुर्ति करने वाली होती है. इस दिन कुंडली मे आने वाले सभी दोषो का का निवारण किया जाता है जैसे कि.. कालसर्प दोष, चांडाल दोष, ग्रहन दोष, विष दोष, मांगलिक दोष ईत्यादि. इसके अलावा..

  • शादी व्याह, सगाई जैसे मंगल कार्य मे लाभ मिलता है.
  • तंत्र से छुटकारा मिलता है
  • शत्रु शांत रहते है
  • भूत प्रेत बाधा शांत हो जाती है
  • व्यापार बाधा नष्ट होने लगती है
  • नौकरी, इंटरव्यू मे लाभ मिलता है
  • विवाद नष्ट होने लगते है
  • पारिवारिक क्लेश शांत होने लगते है
  • पति-पत्नि के विवाद नष्ट होने लगते है
  • योग्य संतान की प्राप्ति होती है
  • संतान के बुरे आचरण मे सुधार होने लगता है
  • रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढने लगती है

इस पूजन शिविर मे रुद्राभिषेक के साथ गोपनीय पाशुपत पूजा संपन्न हो रही है, जो कि उच्च कोटि की पूजा मानी जाती है. भाग्यवान लोग ही इस इस तरह के पूजन शिविर मे भाग ले पाते है, अगर किसी कारण से शिविर मे भाग नही ले पाते तो आप ऑनलाईन भी भाग ले सकते है.

 February 15, 2021 

शिवानंद दास जी के मार्गदर्शन मे

बगलामुखी साधना शिविर- वज्रेश्वरी

BAGALAMUKHI SADHANA SHIVIR

(Sat+Sun) 13-14 March. 2021 at Vajreshwari near mumbai.

Mata Baglamukhi Mahavidya is considered to be the enemy destroyer, it immediately destroys any kind of jealousy, tantra, blackmagic or any kind of negative energy coming by the enemy. Court-court, debates, conspiracies, government hurdles keep away. By this sadhana, person gets rid of himself and his family from all kinds of obstacles.

माता बगलामुखी महाविद्या शत्रु विनाशिनी मानी जाती है ये शत्रु के द्वारा आने वाली किसी भी प्रकार की नजर, तंत्र, ब्लैकमजिक या किसी भी प्रकार का नकारात्मक उर्जा को तुरंत नष्ट कर देती है. कोर्ट-्कचहरी, वाद विवाद, षडयंत्र,सरकारी अडचने को हमेशा दूर रखती है. इस साधना के द्वारा ब्यक्ति अपने व अपने परिवार को हर तरह की बाधा से सुरक्षित कर देता है.

इस शिविर मे १२५००० से लेकर ५५०००० तक जप हवन का अनुष्ठान होगा. इसमे भाग लेना किसी सौभाग्य से कम नही है. इसलिये एक बार अवश्य जरूर इस शिविर मे भाग लेकर अनुभव जरूर प्राप्त करे!

BAGALAMUKHI SADHANA BOOKING

Shivir Location- https://goo.gl/maps/AWUTZNAyjky

Fees 8000/- Including- Sadhana samagri (Siddha Bagalamukhi Yantra, Siddha Bagalamukhi mala , Siddha Bagalamukhi parad gutika, Bagalamukhi asan, Siddha Chirmi beads, Gomati chakra, Tantrokta nariyal, siddha kaudi, Siddha Rakshasutra and more.) + Bagalamukhi Diksha by Guruji+ Room Stay with Complementary Breakfast, Lunch, Dinner. (Husband-wife 12000/-) (Pay 1000/- booking and balance pay on shivir)

Call for booking-91 7710812329/ 91 9702222903