March 25, 2017

ओंकार त्राटक की रहस्यमयी शक्ति

कहते है कि ब्रम्हांड की रचना पृथम शब्द ओंकार के साथ ही शुरु हुयी थी. और ॐ से ही मन्त्रो की रचना भी हुयी. दुनिया मे सबकुछ ओंकार मे ही समाविश्ट है. आत्मिक शांती तथा मोक्ष का द्वार ही ओंकार है. हमने ओंकार ध्यान के बारे सुना है, ओंकार जप के बारे मे सुना है. लेकिन आज हम ॐकार त्राटक के बारे मे जानेगे. त्राटक की खास बात यह है कि आप जिस भी वस्तु, देवता या चक्र पर त्राटक करते है, तो उसके गुण आपके अंदर आ जाते है. तो सबसे पहले जानते है ओंकार त्राटक के लाभ कौन कौन से है.

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ओंकार त्राटक से लाभ

  • किसी क्षेत्र मे अगर आप पिछड गये हो चाहे वह ज्ञान का क्षेत्र हो, कर्म का क्षेत्र हो, किसी ब्यवसाय का क्षेत्र हो, तो. इस कारण से उदासीनता बढ जाती है. यहा आपको ओंकार त्राटक से लाभ मिलता है.
  • हर तरक की सुरक्षा के साथ दुर्घटना मे भी सुरक्षा मिलती है
  • ओंकार त्राटक से बुरे कर्म या बुरे संस्कार नष्ट होकर शरीर मे साकारात्मक उर्जा का निर्माण शुरु हो जाता है.
  • ओंकार त्राटक से धीरे धीरे आपके आचरण मे सुधार आना शुरु हो जाता है, स्वभाव विनम्र हो जाता है. चेहरे पर तेज बढने लगता है.
  • ओंकार त्राटक से अध्यात्मिक रूप से आनंद आने लगेगा.
  • ओंकार त्राटक से मन मे संतोष, संयम तथा तृप्ती का अहसास होना शुरु हो जाता है.
  • ओंकार त्राटक से आपकी वाणी की व मार्केटिंग क्षमता बढनी शुरु हो जाती है.
  • ओंकार त्राटक से अघ्यात्मिक चिकित्सा करने की क्षमता बढ जाती है.
  • ओंकार त्राटक से जब कभी सामने वाले व्यक्ति को कोई राय-मशवरा देगे तो वह उसके लिये अचूक साबित होगी.
  • समाज मे मान-सम्माम मिलना शुरु हो जाता है.
  • धन कमाने के स्रोत बढने शुरु हो जाते है.

अब जानते ओंकार त्राटक कैसे करे

एक शांत कमरे का चुनाव करे कमरे मे रोशनी थोडी कम रखे.. अब अपने ठीक सामने ॐ का लाल रंग चित्र दिवार पर लगाकर जमीन पर या कुर्सी पर बैठ जाय. .. और मन्त्र का उच्चारण १ मिनट तक करे.. अब एकटक उस चक्र को देखते रहे... देखते ही देखते ओंकार मे सुनहरे रंग की रोशनी दिखाई देने लगेगी.. पहले दिन यह अभ्यास ५ मिनट तक ही करे.... अब दुसरे दिन अभ्यास पुनः शुरु करे.. और मन्त्र का उच्चारण १ मिनट तक करे.. और ओंकार पर त्राटक यानी एकटक देखते रहे.... इस तरह से रोज ५ मिनट और २१ दिन तक अभ्यास नियमित करे... इस अभ्यास से आपका आज्ञा चक्र या भ्रू मध्य चक्र चैतन्य होने लगता है.. आज्ञा चक्र का संबंध सुनहरे रंग से है... इसलिये जो कुछ भी महसूस होगा वह अधिकतर सुनहरे रंग का ही होगा. यह चक्र आपके अंदर के तमाम कमियो को दूर करने लगता है... इस त्राटक से स्मरण शक्ति, आत्मविश्वास, मनोबल, इच्छाशक्ति की बढोतरी होनी शुरु हो जाती है.

अगर आप नियमित अभ्यास, श्रद्धा, विश्वास व पूर्ण इच्छाशक्ति के साथ ओंकार त्राटक का अभ्यास करेंगे तो अपने जीवन मे भौतिक व अध्यात्मिक रूप पुर्णता प्राप्त करेंगे. आशा कि ये विधि को आजमायेगे और अपने जीवन मे सफलता प्राप्त करेगे.

March 21, 2017

राम नवमी के दिन का लाभ उठाये

धार्मिक ग्रंथो के अनुसार चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को प्रभु श्री राम का जन्म दिन माना जाता है यही दिन रामनवमी कहलाती है।

देश के कई हिस्सों में रामनवमी का त्‍योहार पूरे हर्षोल्‍लास के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में रामनवमी का विशेष महत्व है। भगवान श्रीराम का जन्म वैसे तो बेहद शुभ पर समय होता है, लेकिन इस शुभ दिन कुछ और दुर्लभ योग भी बन जाते हैं। इस दिन कुछ विशेष साधना या पूजा की जाय तो सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण हो जाती है.

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याद रखे कि शुभ मुहुर्थ मे किया गया कार्य ही सफलता प्रदान करता है. इस दिन कुछ उपाय करे तो आप अपनी मनोकामना पूर्ण कर सकते है.

  • इस दिन कुवॉरी कन्या "॥ॐ श्रीं रामाय रामाय श्रीं नमः॥" का १००१ जाप करे व अपने मन-पसंद वर की कामना करे, तो उनकी मनोकामना पूर्ण होती है.
  • इस दिन पत्नि रात मे खीर बनाये और उस खीर को चंद्रमा की रोशनी मे १ घंटा रखे, फिर पति-पत्नि मिलकर खाये तो दोनो मे कटुता समाप्त होकर प्रेम बढता है तथा पति अपनी पत्नि से हमेशा वफादार रहता है और वैवाहिक जीवन सु्खमय हो जाता है.
  • इस दिन एक कटोरी मे गंगा जल या पानी लेकर राम रक्षा मंत्र "ॐ श्रीं ह्कीं क्लीं रामचंद्राय श्रीं नमः" का १०८ बार जाप करे और संपूर्ण घर के कोने-कोने मे छिडकाव करे, इससे घर मे भूत-प्रेत, नजर बाधा, तन्त्र बाधा तथा वास्तु दोष समाप्त हो जाते है. यह उपाय अपने ऑफिस- दुकान या ब्यवसाय स्थल मे भी कर सकते है.
  • इस दिन दान अवश्य करे
  • इस दिन सोने-चॉदी की खरीदी कर सकते है.
  • इस दिन अपनी दुकान का उद्घाटन कर सकते है.
  • इस दिन नये घर मे प्रवेश कर सकते है.

आशा है कि ये उपाय को आजमाकर अपने जीवन मे सफलता प्राप्त करेगे

March 20, 2017

अष्ट-यक्षिणी की रहस्यमयी शक्तिया

आज हम यक्षिणी और उनकी रहस्यमयी शक्तियो के बारे मे जानेगे. हमारे शास्त्रो मे इनके नाम बार-बार आते है जैसे कि देवी-देवता के अलावा, दैत्य, दानव, राक्षस, यक्ष, गंधर्व, अप्सराएं, पिशाच, किन्नर, वानर, रीझ, भल्ल, किरात, नाग, भूत-प्रेत आदि। ये सभी रहस्यमयी ताकते इंसानो से कुछ अलग थे। और ये सभी इंसानो की यहॉ तक कि देवताओ की भी किसी न किसी प्रकार से मदत करते थे. सात्विक गुणो मे देवी-देवताओ के बाद यक्ष - यक्षिणी का ही नाम आता है। इनमे से किसी को भी हमारा आज का विज्ञान स्वीकार नही करता यहा तक कि देवी-देवताओ को भी विज्ञान नही मानता.

लेकिन आज हम इनके बारे मे विज्ञान की दृष्टी से नही बल्कि अपने शास्त्रो की दृष्टी से जानेगे.

इनमे यक्ष-यक्षणी, गंधर्व, अप्सराये,किन्नर ये सभी सात्विक गुण वाले होते है. तथा अन्य सभी तमोगुण यानी तामसिक गुण वाले होते है.

लोग यक्ष-यक्षणी को भूत-प्रेत की तरह से मानते है, लेकिन यह सही नही है. आज हम कुबेर को भगवान की तरह ही मानते है जो कि ये यक्ष पजाति से है. और इन्हे यक्षराज भी कहा जाता है. संपूर्ण सृष्ठी मे जो अचल संपति है वह इन्ही की मानी जाती है. इनकी पूजा साधना लोग भौतिक सुख प्राप्त करने के लिये करते है. शास्त्रानुसार एक यक्ष ने ही अग्नि, इंद्र, वरुण और वायु का घमंड चूर-चूर कर दिया था।

लेकिन आज हम यक्षिणी की बात करेगे. शास्त्रानुसार 8 यक्षिणियां प्रमुख मानी जाती है. इनकी पूजा - साधना भी देवताओ की तरह ही होती है, जिससे ये प्रसन्न होकर संपूर्ण सुख की प्राप्ति कराते है. इनकी साधना स्त्री-पुरुष दोनो ही कर सकते है.

यक्षिणी साधक के सामने एक बहुत ही सौम्य और सुन्दर स्त्री के रूप में प्रस्तुत होती है। किसी योग्य गुरु या जानकार से पूछकर ही यक्षिणी साधना करनी चाहिए। यहां प्रस्तुत है यक्षिणियों की रहस्यमयी जानकारी।

याद रखे यह शास्त्रो के माध्यम से यह मात्र जानकारी आपको दी जा रही है साधक अपने विवेक से काम लें। यह साधना तीन रूप मे की जाती है, इस साधना को माता के रूप मे, बहन के रूप मे या प्रेमिका के रूप मे संपन्न की जाती है.

इन ऑठो यक्षिणियो की एक साथ मे भी साधना की जाती है जिसे अष्ट-यक्षिणी साधना कहते है. इनका मन्त्र है ... "ॐ ऐं श्रीं अष्ट यक्षिणी सिद्धिं सिद्धिं देहि नम" . अब जानते है आठो यक्षिणियो का स्वभाव.

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सुर सुन्दरी यक्षिणी : इस यक्षिणी के बारे मे कहा जाता है कि इनकी साधना आप जिस रूप मे करना चाहते है ये उस रूप मे आकर स्वप्न के के माध्यम से आपकी सहायता करती है. यदि इनकी साधना पुरे नियम से व अच्छे उद्देश्य से कर रहे है तो साधना सिद्ध होने के बाद साधक को ऐश्वर्य, धन, संपत्ति आदि प्रदान करती है. ये अप्सरा की तरह से सुंदर होने की वजह से इन्हे सुर-सुंदरी कहा जाता है. सुर सुंदरी यक्षिणी का मंत्र है "ॐ ऐं ह्रीं आगच्छ सुर सुन्दरी स्वाहा "

मनोहारिणी यक्षिणी : मनोहारिणी यक्षिणी का चेहरा अण्डाकार, नेत्र हरिण के समान और रंग गौरा माना जाता है. इस यक्षिणी की साधना सिद्ध होने के बाद साधक का संपूर्ण शरीर संमोहक बन जाता है, उसकी जबर्दस्त आकर्षण शक्ति बढ जाती है. इसके अलावा यक्षिणी के द्वारा उसे भौतिक सुख की भी प्राप्ती होती है. इस साधना के दौरान साधक को चंदन की खुशबु का लगातार अहसास होता रहता है. मनोहारिणी यक्षिणी का मंत्र है "ॐ ह्रीं आगच्छ मनोहारिणी स्वाहा "

कनकावती यक्षिणी :यह खूबसूरत यक्षिणी लाल रंग के वस्त्र धारण किये रहती है। कनकावती यक्षिणी साधना को सिद्ध करने के बाद साधक में तेज- चमक बढ जाती है, उसकी आकर्षण शक्ति इतनी बढ जाती है कि वह अपने विरोधी को भी मोहित करने की क्षमता प्राप्त कर लेता है। इसके अलावा ये यक्षिणी साधक की प्रत्येक मनोकामना को पूर्ण करने मे मदत करती है। कनकावती यक्षिणी का मंत्र है "ॐ ह्रीं हूं रक्ष कर्मणि आगच्छ कनकावती स्वाहा"

कामेश्वरी यक्षिणी : इस यक्षिणी का स्वभाव चंचल होता है. ये यक्षिणी पुरुष साधक को यौन समस्याओ को समाप्त करके पौरुष प्रदान करती है तथा स्त्री साधक को प्रबल आकर्षण प्रदान करती है. इसके अलावा साधक भौतिक रूप से भी सफल होने लगता है. कामेश्वरी यक्षिणी का मंत्र है "ॐ क्रीं कामेश्वरी वश्य प्रियाय क्रीं ॐ "

रति प्रिया यक्षिणी : इस यक्षिणी की देह स्वर्ण के समान होती है इस यक्षि़णी साधक को हर क्षेत्र मे आनंद प्रदान करती रहती है. ये अपने साधक यानी किसी भी स्त्री-पुरुष को कामदेव- रति के समान आकर्षण तथा सौंदर्य प्रदान करती है. रति प्रिया यक्षिणी का मंत्र है "ॐ ह्रीं आगच्छ आगच्छ रति प्रिया स्वाहा "

पदमिनी यक्षिणी : ये श्यामवर्णा, सुंदर नेत्र और सदा प्रसन्नचित्र करने वाली यह यक्षिणी व अत्यक्षिक सुंदर देह वाली मानी गई है। पद्मिनी यक्षिणी अपने साधक में आत्मविश्वास व स्थिरता प्रदान करती है तथा सदैव उसे मानसिक शक्ति प्रदान करती हुई साधक को अपने क्षेत्र मे सफलता की ओर ले जाती है. यह हमेशा साधक के हर कदम पर उसका मनोबल को बढ़ाती रहती है। पद्मिनी यक्षिणी का मंत्र है "ॐ ह्रीं आगच्छ आगच्छ पद्मिनी स्वाहा "

नटी यक्षिणी : कहा जाता है कि नटी यक्षिणी को विश्वामित्र ने भी सिद्ध किया था। यह यक्षिणी अपने साधक को शत्रुओ से सुरक्षा प्रदान करती है तथा हर तरह की दुर्घटना मे भी रक्षा करती है. नटी यक्षिणी का मंत्र है "ॐ ह्रीं आगच्छ आगच्छ नटी स्वाहा "

अनुरागिणी यक्षिणी : ये सफेद चमकीले वस्त्र धारण करती है. यदि इनकी साधना सिद्ध हो जाय तो साधक को धन, मान, यश आदि से तृप्त कर देती है।अनुरागिणी यक्षिणी का मंत्र है "ॐ ह्रीं अनुरागिणी आगच्छ स्वाहा"

आशा है कि ये जानकारी आपके लिये उपयोगी होगी. इसे अपने विवेक के आधार पर ही किसी के मार्ग दर्शन मे करने की कोशिश करनी चाहिये.

Know all kind of yakshini's

March 15, 2017

अपनी सकारात्मक उर्जा को बढाये!

पूर्व जन्म मे किये गये कर्मो के आधार पर ही इस जन्म मे ब्यक्ति नकारात्मक व साकारात्मक उर्जा को लेकर जन्म लेता है. नकारात्मक व सकारात्मक उर्जा का अर्थ है नेगेटिव व पॉजीटिव एनर्जी. इस उर्जा के अनुरूप ही ब्यक्ति का स्वभाव बनता है. जैसे नकारात्मक उर्जा से ब्यक्ति मे घमंड, डर, निराशा, लोभ, क्रोध, स्वार्थ तथा सकारात्मक उर्जा से प्रेम, दया, आत्मविश्वास, प्रबल ईच्छाशक्ति, समाज सेवा, भक्ति, गुरु सेवा ई. स्वभाव बनता है इन दोनो उर्जाओ को ब्यक्ति अपने वाणी से, स्वभाव से तथा कर्म से मजबूत करता रहता है. यानी नकारात्मक उर्जा ब्यक्ति मे डर, निराशा, लोभ, क्रोध, स्वार्थ, बुरी आदते, ब्यसन ई को दिनो दिन बढाती रहती है. और सकारात्मक उर्जा यानी पॉजीटिव एनर्जी दया, प्रेम, आत्मविश्वास, मनोबल, इच्छा शक्ति, भक्ति ईत्यादि को दिनो दिन बढाती रहती है. नकारात्मक उर्जा से ब्यक्ति का धीरे धीरे पतन होना शुरु हो जाता है. और सकारात्मक उर्जा से ब्यक्ति सफलता की ऊचाइयो पर पहुचना शुरु हो जाता है.

अब पृश्न यह उठता है कि कैसे हम अपनी नकारात्मक उर्जा को सकारात्मक उर्जा मे बदले... यहॉ यह आप पर निर्भर करता है कि आप कौन सी उर्जा को बढावा दे रहे है.

सबसे पहले आप अपने आप का विश्लेषण करे यानी अपने आपको जाने कि आप कौन सी उर्जा को बढावा दे रहे है. अगर आप मे घमंड, लोभ, वाद विवाद, संघर्ष, विरोध, असहमति, अहंकार, घृणा, संकुचित मानसिकता ईत्यादि आदते है या इनमे से कोई आदत है तो आप नकारात्मक उर्जा को बढावा दे रहे है. इससे ये समस्या दिनो दिन बढती ही जायेगी. .... तो आइये जाने कि कैसे हम सकारात्मक उर्जा का निर्माण करे...

ये कुछ उपाय आपको सकारात्मक उर्जा बढाने मे मदत कर सकते है..... जिससे आपके अंदर प्रेम, शान्ति, सुखद सम्बन्ध, अच्छी कार्य क्षमता, अच्छी समझ, ज्ञान और आनंद की बढोतरी हो सके. क्योकि यही सकारात्मक उर्जा आगे चलकर कुंडलिनी शक्ति के जागरण मे मदत करती है.

See how to increase your positive energy

  • रोज धार्मिक पुस्तको का अध्यन करे.
  • अपनी क्षमता अनुसार किसी की मदत अवश्य करो.
  • कही सत्संग हो तो उसमे शामिल हो.
  • सबसे नम्र होकर बात करे.
  • बिपरीत परिस्थिती मे भी अपने मन यानी स्वभाव पर नियंत्रण रखे.
  • जो दोस्त आपको मोटीवेट करते है यानी जो आपको हौसला देते है, उनकी ही संगत करे.
  • यह मान कर चले कि दुनियॉ मे ऐसा कोई काम नही है, जो आसानी से सफल हो जाये. इसलिये किसी भी तरह की अडचन आती है, तो मै उसका सामना करुंगा. ऐसी भावना रखे.
  • जरूरी नही है कि आप रोज धार्मिक पुस्तके या रोज सत्संग मे शामिल हो, आप सिर्फ अच्छे कर्म करो यही बहुत है, क्योकि अच्छे कर्म मे ही ईश्वर बसते है.

याद रखे निगटिव उर्जा को पॉजीटिव उर्जा मे बदलना आसान नही होता, क्योकि निगेटिव उर्जा आसानी से शरीर मे प्रवेश कर जाती है लेकिन हठी स्वभाव की वजह से जल्दी निकलती नही. यही कारण है जब आप कुछ अच्छे कर्म करने की कोशिश करते है या ध्यान - धारना करते है, तो नकारात्मक उर्जा ब्यवधान उत्पन्न करती है... क्योकि नकारात्मक उर्जा का काम है समस्याये पैदा करना तथा सकारात्म उर्जा यानी पॉजीटिव एनर्जी का काम है समस्याओ को समाप्त करना. इसलिये जब आप ध्यान - धारणा या अच्छे कर्म करने की कोशिश करते है तो नकारात्मक उर्जा उस काम को न करने के लिये दबाव डालती है.

इसलिये जब आप धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन, सत्संग, मन्त्र जाप, निःस्वार्थ सेवा और अन्य सकारात्मक कर्म करेगे तो नकारात्मक उर्जा के कारण ब्यवधान अवश्य उत्पन्न होगा लेकिन अपनी प्रबल शक्ति से अपने मार्ग मे बढते रहे तो धीरे-धीरे नकारात्मक उर्जा कम होनी शुरु हो जायेगी और आप अपने क्षेत्र मे, कार्य मे सफल होना शुरु हो जायेगे या आपकी मनोकामना पूरी होनी शुरु हो जायेगी.

आशा है कि आप इन नियमो का पालन करेगे तथा अपने जीवन को सुखमय बनायेग

March 15, 2017

मंत्र जप नियम

मंत्र जप क्या है? ... जब किसी भी मंत्र का बार-बार उच्चारण किया जाता है तब उसमे कंपन पैदा होता है. और शरीर के संबंधित भाग को वह उत्तेजित करता है. जैसे कि लक्ष्मी का मंत्र जपते है तो बार-बार जपने से जो कंपन यानी वायब्रेशन पैदा होता है, वह मष्तिष्क के ऐसे भाग को उत्तेजित करता है, जिसका संबंध निर्णय लेने की क्षमता पर पडता है, तब आप अपने कार्य क्षेत्र या व्यवसाय के क्षेत्र मे जो निर्णय लेते है वह अचूक होता है इससे पैसे आने के रस्ते खुलने शुरु हो जाते है. इसी तरह से माता सरस्वती माता सरस्वती का मंत्र जब बार बार जपते है, उससे जो कंपन तैयार होता है, उसका असर आपके गले व बुद्धि पर पडता है, जिससे मार्केटिंग क्षमता, भाषण कलॉ, अभिनय कलॉ, शिक्षा क्षेत्र, गायन तथा लेखन क्षेत्र ई. मे सफलता मिलनी शुरु हो जाती है. इसी तरह से जब हम किसी भी मन्त्र को बार-बार यानी हजारो बार जपते है, तो उससे निकलने वाली कंपन या उर्जा की शक्ति से हम अपनी मनोकामना की पुर्ति कर सकते है.

अब जानते है कि मन्त्र जप कितने प्रकार के होते है.

See mantra jap rules

मंत्र जप के ३ प्रकार होते है, पहला मानसिक जप, दूसरा वाचिक जप, तीसरा उपांशु जप.

मानसिक जपः देवी-देवताओ से संबंधित वैदिक मंत्र जपने मे किया जाता है. इसे मन ही मन जपा जाता है.

वाचिक जपः इसका उपयोग देवी-देवताओ से संबंधित तांत्रिक तथा वाम मार्गी मंत्र जपने मे किया जाता है. इसे जोर से बोलकर जपा जाता है. अघोर साधना, विद्वेषण, उच्चाटन, मारण मे वाचिक जप किया जाता है.

उपांशु जपः यह मनोकामना से संबंधित जैसे आकर्षण, वशीकरण, हेल्थ संबंधित मन्त्रो मे उपांशु जप किया जाता है, यह होठो को हिलाकर यानी बु्दबुदाकर जप किया जाता है, इसमे मन्त्र की आवाज सामने वाले को सुनाई नही देती सिर्फ उसके होठ हिलते हुये दिखाई देते है.

देवी-देवताओ से संबंधित मन्त्र अगर आप जप रहे तो उसे नियमित और समय पर जपे.

मन्त्र जपते समय बीच से न उठे

मन्त्र जपते समय फोन, मोबाईल, घर के दरवाजे की घंटी को बंद रखे.

घर मे अगर्बत्ती या इत्र का उपयोग करे, जिससे मन्त्र जपते समय आपका मन लगा रहे.

जपने वाले मन्त्र को किसी न बताये.

रोज नियमित संख्या मे ही मंत्र जपे. जितना आप जाप कर सकते है उतनी ही मात्रा मे रोज जपने का संकल्प करे.

कम से कम १ माला यानी १०८ बार मन्त्र जप अवश्य करे.

मन्त्र की जप संख्या जब बढने लगती है, तब शरीर मे कंपन या उर्जा बढने लगती है, उस समय आपको पसीना या चक्कर आना शुरु हो जाता है, इससे डरे नही अभ्यास चालू रखे.

इन सभी नियमो का पालन करेगे तो पुजा, साधना मे आप अवश्य सफल होंगे.

March 14, 2017

कुंडलिनी क्या है

कुंडलिनी जिसे हम सर्पेंट पॉवर भी कहते है. वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर यह प्रमाणित हो चुका है कि मनुष्य का शरीर जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी तथा काश इन पांच तत्वों से निर्मित होता है। और इसमे कोई संदेह नही कि जो चीज जिस तत्व से बनी हो उसमे उस तत्व के सारे गुण समाहित होते हैं। इस लिए पंचतत्वों से निर्मित मनुष्यों के शरीर में जल की शीतलता, वायु का तीब्र वेग, अग्नि का तेज, पृथ्वी की गुरूत्वाकर्षण, ओर आकाश की विशालता समाहित होता है। इससे उसके अंदर प्रचंड शक्ति आ जाती है लेकिन वह सुप्त अवस्था मे रहती है, उसी सुप्त शक्ति को जगाने की क्रिया को कुडंलिनी जागरण कहते है.

कुंडलिनी यह एक सॉप जैसे आकार की ऐसी शक्ती होती है जो अपने पूंछ को मुंह मे दबाये साढे-तीन फेरे मारे हुये मूलाधार मे सुप्त अवस्था मे स्थित होती है, इसे ध्यान योग, क्रिया योग, तन्त्र या मंत्र के द्वारा जाग्रत किया जाता है. मुलाधार में सुप्त पड़ी हुई कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत होकर सुषुम्ना नाडी में प्रवेश करती है तब यह शक्ति अपने स्पर्श से स्वाधिष्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, अनाहत चक्र, तथा आज्ञा चक्र से होते हुये सहस्त्रार चक्र तक पहुचती है इसी क्रिया को पुर्ण कुण्डलिनी जागरण कहा जाता है।

जब मूलाधार चैतन्य होना शुरु होता है, तब पॉचो तत्व मे से पृथ्वी तत्व की अधिकता बढ जाती है. इससे मनुष्य के अंदर जिज्ञासा बढनी शुरु हो जाती है, शरीर मे कंपन आना शुरु हो जाता है. मूलाधार मे विद्युत की तरंगे चलती हुयी महसूस होती है. तथा बुद्धि का विकास सही तरह से होता है. यह चक्र चैतन्य होने से योन समस्या, यानी गुदा भाग से लेकर पैर के अंगूठे तक के भाग का ब्लड सरकुलेशन तेज होने लगता जिससे उस भाग मे होने वाली समस्याये दूर होने लगती है.

जब स्वाधिष्ठान चक्र चैतन्य होना शुरु होता है, तब पॉचो तत्व मे से दो तत्व या पृथ्वी और जल तत्व की अधिकता बढ जाती है. इससे मनुष्य के अंदर जिज्ञासा के साथ उसे पाने व अनुभव करने का मन होने लगता है. बढनी शुरु हो जाती है, शरीर मे कंपन आना शुरु हो जाता है. मूलाधार मे विद्युत की तरंगे चलती हुयी महसूस होती है. तथा बुद्धि का विकास सही तरह से होता है. स्वाधिष्ठान चक्र का असर स्वभाव पर तेजी से होता है. जिससे हर तरह का व्यसन, बुरा स्वभाव, बुरी आदते, बुरे कर्म छोडने मे मदत मिलती है तथा सीखने की क्षमता बढती है.

जब मणीपुर चक्र चैतन्य होना शुरु होता है, तब पॉचो तत्व मे से तीन तत्व यानी पृथ्वी, जल तथा अग्नि तत्व की अधिकता बढ जाती है. इससे मनुष्य मे जोश, तेज व साहस बढ जाता है, तथ वहा हर तरह की परिस्थिति का सामना कर लेता है. शरीर मे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ जाती है. बिमारी से बचाव होता है, यही नही हर प्रकार के नजर तथा तंत्र के प्रभाव से भी सुरक्षा मिलती है. अगर आप बिमार है, भले यह बिमारी शारीरिक या मानसिक हो, तब आप समझ लीजीये कि आपका मणीपुर चक्र खराब है.

जब अनाहत चक्र चैतन्य होना शुरु होता है, तब पॉचो तत्व मे से चार तत्व यानी पृथ्वी, जल,अग्नि तथा वायु तत्व की अधिकता बढ जाती है. इससे मनुष्य का कठोर स्वभाव भावुकता मे बदलना शुरु हो जाता है इसके अलावा भावना पर नियंत्रण भी बना रहता है. जब अनाहत चक्र जाग्रत होने लगता है तो ऐसे लोगो के स्वभाव का कोई फायदा नही उठा पाता. तथा ये दोस्ती तथा प्यार मे धोखा खाने से बच जाते है.

जब विशुद्ध चक्र चैतन्य होना शुरु होता है, तब पॉचो तत्व शरीर मे बराबर काम करना शुरु कर देते है. ब्यक्ति के सभी चक्र बैलेंस हो जाते है. इस चक्र के अभ्यास से ब्यक्ति की बुद्धी बहुत ही तेजी से काम करती है. इसकी वजह से वह अपने कार्य क्षेत्र, ब्यापार, व्यवसाय, कलॉ क्षेत्र, गायन, लेखन, चित्रकारी तथा अभिनय क्षेत्र मे तेजी से तरक्की करता है.

जब आज्ञा चक्र चैतन्य होना शुरु होता है, तब पूरे शरीर मे शारीरिक व मानसिक रूप से नियंत्रण बढना शुरु हो जाता है. जीवन मे आगे बढने के लिये मानसिक रूप से शक्ति मिलनी शुरु हो जाती है. इस चक्र के सहारे ब्यक्ति को अपने मन-पसंद क्षेत्र मे बढने मे मदत मिलती है.

जब सहस्त्रार चक्र चैतन्य होना शुरु होता है, तब पूरे शरीर मे शारीरिक , मानसिक व अध्यात्मिक रूप से नियंत्रण बढना शुरु हो जाता है. यह चक्र आपके विचारो को शक्ति प्रदान करता है. इससे ब्यक्ति फोटो थेरिपी, डिस्तेंस हीलिंग, विचार प्रक्षेपण सिद्धी मे सफलता मिलनी शुरु हो जाती है. जो रेकी, प्रानिक हीलिंग के विद्यार्थी है उन्हे इस चक्र पर अभ्यास अवश्य करना चाहिये.

अंत मे मै सिर्फ यही कहना चाहता हु कि आप इन चक्रो का अभ्यास जरूर करे. इससे डरने की जरूरत नही है. हॉ किसी के मार्ग-दर्शन मे यह अभ्यास जरूर करे. मैने अलग अलग चक्रो पर अभ्यास कैसे करे इसका लिंक नीचे डिस्क्रिप्शन मे दिया गया है वहा आप सीख सकते है. आशा है कि आप इन चक्रो पर अभ्यास कर लाभ प्राप्त करेगे तथा दूसरो को भी लाभ लेने मे मदत करेगे.

See Kundalini power on youtube

March 12, 2017

सहस्त्रार चक्र कैसे सिद्ध करें ?

यह चक्र का स्थान सिर के बीच मे यानी जिस जगह लोग चोटी रखते है वह जगह माना जाती है सहस्त्रार चक्र में त्राटक करने से उस चक्र में प्राण और मन स्थिर होता है, इससे आपके अंदर बुरे कर्मो का नाश होकर, ब्यसन मुक्त होकर योग के मार्ग या अच्छे कर्म करने इच्छा बलवती होती है. आपकी आवाज भी निर्मल हो जाती है यानी कठोर स्वभाव से नरम स्वभाव हो जाता है. इसी चक्र से समाधी मे जाने की क्रिया शुरु हो जाती है. तथा इट्यूशन का अनुभव आना शुरु हो जाता है... इंट्यूशन का अर्थ है कि.....

अब जानते सहस्रार चक्र पर त्राटक कैसे करे

To know how to activate sahastrar chakra

एक शांत कमरे का चुनाव करे कमरे मे रोशनी थोडी कम रखे.. अब अपने ठीक सामने सहस्रार चक्र का चित्र दिवार पर लगाकर जमीन पर या कुर्सी पर बैठ जाय. .. और २१ बार श्वास खीचे तथा छोडे. अब मन्त्र का उच्चारण १ मिनट तक करे.. अब एकटक उस चक्र को देखते रहे... देखते ही देखते आज्ञा चक्र मे सुनहरे रंग की रोशनी दिखाई देने लगेगी.. पहले दिन यह अभ्यास ५ मिनट तक ही करे.... अब दुसरे दिन अभ्यास पुनः शुरु करे.. और मन्त्र का उच्चारण १ मिनट तक करे.. और सहस्रार चक्र पर त्राटक यानी एकटक देखते रहे.... इस तरह से रोज ५ मिनट और २१ दिन तक अभ्यास नियमित करे... इस अभ्यास से आपका सहस्रार चक्र या क्राउन चक्र चैतन्य होने लगता है.. सहस्रार चक्र का संबंध वॉयलट रंग से यानी बैगनी रंग से है... इसलिये जो कुछ भी महसूस होगा वह वॉयलेट कलर मे ज्यादा दिखाई दे तो समझये कि आप सही रास्ते पर है... यह चक्र आपके अंदर के तमाम कमियो को दूर करने लगता है... मन मे अच्छे विचार लाता है... यह चक्र चैतन्य होने पर ही कुंडलिनी जागरण की शुरुवात होती है...इस त्राटक से स्मरण शक्ति, आत्मविश्वास, मनोबल, इच्छाशक्ति की बढोतरी होनी शुरु हो जाती है. इसलिये इस सहस्रार चक्र का नियमित अभ्यास करे और अपने कार्यक्षेत्र मे सफलता पाये... आशा है कि आप इस नियम का पालन व अभ्यास करके अपने आपको स्वस्थ व निरोगी बनायेंगे तथा लोगो की मदत भी करेंगे.

March 6, 2017

आज्ञा चक्र त्राटक

यह चक्र दोनो ऑखो के बीच यानी भ्रू मध्य मे स्थित होता है। इस चक्र मे कोई तत्व नही होता. इसका कलर गोल्डन माना यानी सुनहरा रंग माना जाता है...इस चक्र को चैतन्य करने के लिए इसका मूल मंत्र ” ॐ ” का उच्चारण करना चाहिए। यह चक्र आपको अपने मंजिल पर पहुचाने के लिये मदत करता है. आपके विचार पॉजीटिव होने लगते है. अपनी गल्तियो का अहसास होता है तथा उसे सुधारने का प्रयत्न शुरु कर देते है. यह चक्र आपको शारीरिक, मानसिक व अध्यात्मिक रूप से आपको मजबूत बनाता है. ध्यान मे मन लगना शुरु हो जाता है. अगर आप साधना के क्षेत्र मे है तो सफलता का प्रतिशत बढ जाता है. मेरा अपना अनुभव यह है कि अगर आप बिना स्वार्थ किसी के बारे मे अच्छा सोचे तो उसे लाभ मिलता है. यानी डिस्टेंस हीलिंग की क्षमता बढ जाती है. यह चक्र आपको ध्यान की अथाह गहराई मे जाने के लिये मदत करता है. आज्ञा चक्र मन और बुद्धि के मिलन स्थान माना जाता है.

अब जानते आज्ञा चक्र पर त्राटक कैसे करे

एक शांत कमरे का चुनाव करे कमरे मे रोशनी थोडी कम रखे.. अब अपने ठीक सामने आज्ञा चक्र का चित्र दिवार पर लगाकर जमीन पर या कुर्सी पर बैठ जाय. .. और मन्त्र का उच्चारण १ मिनट तक करे.. अब एकटक उस चक्र को देखते रहे... देखते ही देखते आज्ञा चक्र मे सुनहरे रंग की रोशनी दिखाई देने लगेगी.. पहले दिन यह अभ्यास ५ मिनट तक ही करे.... अब दुसरे दिन अभ्यास पुनः शुरु करे.. और मन्त्र का उच्चारण १ मिनट तक करे.. और आज्ञा चक्र पर त्राटक यानी एकटक देखते रहे.... इस तरह से रोज ५ मिनट और २१ दिन तक अभ्यास नियमित करे... इस अभ्यास से आपका आज्ञा चक्र या भ्रू मध्य चक्र चैतन्य होने लगता है.. आज्ञा चक्र का संबंध सुनहरे रंग से है... इसलिये जो कुछ भी महसूस होगा वह अधिकतर सुनहरे रंग का ही होगा. यह चक्र आपके अंदर के तमाम कमियो को दूर करने लगता है... इस त्राटक से स्मरण शक्ति, आत्मविश्वास, मनोबल, इच्छाशक्ति की बढोतरी होनी शुरु हो जाती है. इसलिये इस आज्ञा चक्र का नियमित अभ्यास करे और अपने कार्यक्षेत्र मे सफलता पाये... आशा है कि आप इस नियम का पालन व अभ्यास करके अपने आपको स्वस्थ व निरोगी बनायेंगे तथा लोगो की मदत भी करेंगे.

Know more about Agya chakra (Third eye) tratak

March 6, 2017

गुरुपुष्यामृत योग

आज हम जानेगे गुरु पुष्य नक्षत्र के बारे जिसे हम गुरुपुष्यामृत योग भी कहते है. साधारण रूप से इसे समझे तो जिस दिन गुरुवार या ब्रहस्पतिवार के दिन पुष्य नक्षत्र हो उस दिन को गुरु पुष्य नक्षत्र योग कह सकते है. अब जानते है कि इसके लाभ क्या क्या हो सकते है...

  • कोई भी ब्यक्ति इस शुभ महूर्त का लाभ प्राप्त कर सकता है। और अशुभ या बुरी अवस्था से बच सकता है.
  • अपने जीवन में दिन-प्रतिदिन सफलता की प्राप्ति के लिए इसदिन से बढकर कोई दिन नही माना जाता.
  • इस दिन यानी गुरु पुष्य नक्षत्र मे नौकरी या इंटर्व्यू के लिये अप्लाई कर सकते है.
  • नये ब्यापार की आधार शिला रखकर सफलता प्राप्त की जा सकती है.
  • सफलता पाने के लिये कोई भी बंद पडा हुआ काम की शुरुवात कर सकते है.
  • कोई भी महत्वपूर्ण काम की शुरुवात कर सकते है
  • इस दिन नई गाडी ले सकते है.
  • इस दिन घर के लिये एडवांस बुकिंग कर सकते है.
  • इस दिन अपने नये घर मे प्रवेश कर सकते है.
  • जो साधना क्षेत्र मे है उन्के इस दिन दिक्षा या लक्ष्मी से संबंधित साधना अवश्य करनी चाहिये.
  • इस दिन कोई भी अध्यात्मिक वस्तु यंत्र, माला ई. अवश्य खरीदनी चाहिये.
  • इस कोई पूजा या अनुष्ठान अवश्य करना या करवाना चाहिये.
  • इस दिन गरीबो को अन्नदान अवश्य करना चाहिये.
  • इस दिन सोने चॉदी की खरीदारी भी शुभ मानी गयी है.

इसके अलावा....

Know abou Guru pushya nakshatra yog

  • इस दिन पति-पत्नि साथ मे किसी भी मंदिर मे जाकर भगवान के दर्शन अवश्य करना चाहिये , जिससे उनकी सभी मनोकामना पूर्ण हो.
  • मन-पसंद वर की प्राप्ती के लिये कुवारी कन्याये इस दिन ३२४ बार या ३ माला "ॐ कात्याने मम् कार्य कुरु कुरु नमः" का जाप कर किसी भी देवी मंदिर मे जाकर माता का दर्शन करना चाहिये.
  • कर्ज से छुटकारा पाने के लियेः- इस दिन लक्ष्मी की मुर्ति या फोटो के सामने "ॐ क्लीं पातु श्रीं रक्षा कुरु कुरु श्रीं नमः" का १० माला यानी १०८० मन्त्र का जाप करे. इससे आपको ऐसा लगेगा कि आप पर माता की कृपा हो रही है.
  • सुख-समृद्धी के लियेः- इस दिन तुलसी का पत्ता हाथ मे लेकर १० माला यानी १०८० बार "ॐ रीं महालक्ष्मेय नमः" का जापकर उस तुलसी को माता लक्ष्मी को चढाये. इससे आपके परिवार मे सुख-समृद्धी बनी रहती है.
  • पढाई मे सफलता पाने के लियेः- इस दिन "ॐ ऐं सरस्वतेय नमः" का ५४० मन्त्र या ५ माला जापकर सब विषयो को थोडा थोडा अवश्य पडना चाहिये.

March 3, 2017

विशुद्ध चक्र त्राटक

यह चक्र का स्थान कंठ में होता है। विशुद्ध चक्र पर त्राटक बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। यह चैतन्य होने लगे तो व्यक्ति को वाणी की सिद्धि प्राप्त होती है। इस चक्र के जागृत होने से ब्यक्ति दिर्घायु होता है , संगीत विद्या व कला के क्षेत्र सफलता प्राप्त होती है सीखने की क्षमता बढती है. व्यक्ति विद्वान होता है तथा अध्यन के क्षेत्र मे सफलता मिलती है. इस चक्र का ध्यान करने से दिव्य दृष्टि, दिव्य ज्ञान तथा समाज के लिए कल्याणकारी भावना पैदा होती है। विशुद्ध चक्र का अर्थ है "पूर्ण निरोगी या पूर्ण शुद्ध" . इसलिये इस चक्र पर त्राटक करने से मनुष्य मे रोग, दोष, भय, चिंता, शोक आदि दूर होकर वह लम्बी आयु को प्राप्त करता है। इस चक्र मे आकाश तत्व की प्रधानता होती है. यह तत्व शरीर मे प्राणशक्ति को बढाता है. इसी तत्व की वजह से मन को एकाग्र करने मे मदत मिलती है.

Know about vishuddha chakra tratak

एक शांत कमरे का चुनाव करे कमरे मे रोशनी थोडी कम रखे.. अब अपने ठीक सामने विशुद्ध चक्र का चित्र दिवार पर लगाकर जमीन पर या कुर्सी पर बैठ जाय. .. और हं बीज मन्त्र का उच्चारण १ मिनट तक करे.. अब एकटक उस चक्र को देखते रहे... देखते ही देखते विशुद्ध चक्र मे रोशनी दिखाई देने लगेगी.. पहले दिन यह अभ्यास ५ मिनट तक ही करे.... अब दुसरे दिन अभ्यास पुनः शुरु करे.. और हं बीज मन्त्र का उच्चारण १ मिनट तक करे.. और विशुद्ध चक्र पर त्राटक यानी एकटक देखते रहे.... इस तरह से रोज ५ मिनट और २१ दिन तक अभ्यास नियमित करे... इस अभ्यास से आपका विशुद्ध चक्र या सोलार चक्र चैतन्य होने लगता है.. विशुद्ध चक्र का संबंध आकाश तत्व से होता है... और आकाश तत्व चैतन्य होने से उसका प्रभाव आवाज या वाणी पर पडता है.. यह चक्र आपके अंदर के तमाम कमियो को दूर करने लगता है... मार्केटिंग क्षमता, भाषण देने की क्षमता मे बृद्धी होती है.. तथा आपको यह पता रहता है कि कब, किससे , कैसे बात करनी है... इसी वजह से आप अपना प्रभाव दूसरो पर डाल पाते है... इसलिये इस विशुद्ध चक्र का नियमित अभ्यास करे और पने क्षेत्र मे सफलता पाये...

Vishuddha chakra tratak