February 15, 2017

त्राटक के नियम

योग मे षटकर्म जैसे नेती- धौती-नौली- वस्ती- कपालभाति और धारणा होते है.. जिसमे नेती- धौती-नौली- वस्ती- कपालभाति ये ५ क्रियाये शारीरिक शुद्धीकरण के लिये माने जाते है... और छठवी क्रिया धारणा जिसे त्राटक भी कहते है ये मानसिक शुद्धीकरण के लिये मानी जाती है...

त्राटक का अर्थ है कि बिना पलक झपकाये एकटक किसी वस्तु- चित्र को देखते रहना.

Tratak Rules

त्राटक २ तरह के माने जाते है.

  • बाह्य त्राटक (बाह्य त्राटक जैसे कि बाहर की कोई भी वस्तु, चित्र पर त्राटक करना)
  • अंतर त्राटक (अंतर त्राटक यानी किसी वस्तु - चित्र को अपने ध्यान मे लाकर त्राटक करना)

त्राटक के नियम

अगर आप त्राटक का अभ्यास करना चाहते तो कुछ नियम का पालन अवश्य करे. जैसे...

  • अघिक तेल, मिर्च, मसाले, खटाई, मांस, धूम्रपान, मद्यपान कम करे....
  • सुबह का अभ्यास सबसे अच्छा माना जाता है....
  • त्राटक का अभ्यास स्त्री-पुरुष कोई भी कर सकता है....
  • त्राटक का संबंध किसी जाति, धर्म, से नही है...
  • १८ वर्ष के ऊपर कोई भी ब्यक्ति बाह्य त्राटक का अभ्यास कर सकता है...
  • १२ वर्ष से ७० वर्ष तक कोई भी अंतर त्राटक कर सकता है...
  • त्राटक करने के लिये आपका कमरा शोरगुल से दूर शांत होना चाहिये...
  • कमरे मे मक्खी, मच्छर न हो इसका ध्यान रखे...
  • कमरे का वातावरण सुगंधित बनाने के लिये इत्र का उपयोग करे...
  • त्राटक का अभ्यास कुर्सी या जमीन पर आसन बिछाकर करे...
  • बिस्तर पर भी बैठकर अभ्यास कर सकते है लेकिन गुरु, देवी-देवताओ के चित्र पर त्राटक करना हो तो जमीन पर या कुर्सी पर बैठ कर करे....
  • किसी त्राटक के अभ्यास को बीच मे बिल्कुल न छोडे... त्राटक के अभ्यास को १० मिनट के ऊपर कभी न ले जाय....
  • किसी भी वस्तु पर त्राटक कर रहे हो तो उसका अभ्यास २१ दिन तक अवश्य करे.....
  • त्राटक करने बाद ऑखो मे पानी अवश्य मारे...
  • मिरर त्राटक करते समय कुछ डरावने अनुभव होते है क्योकि आपका ही चेहरा आईने मे विकृत रूप से दिखाई देता है, इसलिये डरने की जरूरत नही है....
  • मिरर त्राटक मे स्त्री अपने प्रतिबिम्ब की बाई आख मे देखकर त्राटक का अभ्यास करे,,,
  • और पुरुष अपने प्रतिबिम्ब की दाहिनी आख मे देखकर त्राटक करे... १० मिनट के ऊपर त्राटक करने पर आखो मे नुकसान होगा,...
  • आखो की रोशनी धुंधली हो जायेगी.. तथा ज्यादा देर तक त्राटक करने से गर्मियो मे ब्यक्ति को २-२ दिखाई पड सकते है..
  • इसलिये जोश मे ज्यादा देर तक यानी ६ से १० मिनट के ऊपर अभ्यास न करे....
  • अगर आपके आखो मे नम्बर का चश्मा लगा हुआ है तो चश्मा लगाकर ही अभ्यास करे...
  • हमेशा किसी योग्य जानकार के मार्ग दर्शन मे ही अभ्यास करे...
  • याद रखे हमे त्राटक से बहुत ही लाभ मिलता है लेकिन धीरे धीरे व नियमित अभ्यास करने पर ही....
  • जल्दबाजी मे आखो पर दबाव न डाले..

अंत मै इतना ही कहना चाहुंगा कि त्राटक का अभ्यास कोई भी कर सकता है. इसमे कोई मन्त्र जपने की जरूरत नही है...इसके अनगिनत लाभ मिलते है.. जरूरत है संयम, विश्वास और नियमित अभ्यास की... आशा है कि इस त्राटक के नियम का पालन करके आप पने जीवन सफल होगे.

Rules of Tratak

February 13, 2017

शिव रात्री के दिन लाभ उठाये

See what to do on maha shivaratri

हिंदू धर्म मे महाशिवरात्रि एक प्रमुख त्योहार माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर महीना कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को छोटी शिवरात्रि आती है... और फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को महा शिवरात्री आती है... यह दिन कभी फरवरी तो कभी मार्च महीने मे आता है... इस महा शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव-पार्वती की शादी हुयी थी...इस दिन श्रद्धालु पूरी रात जागकर भगवान भोलेनाथ की पूजा- साधना, आराधना तथा भजन मे लगे रहते हैं। कुछ लोग पूरे दिन और रात उपवास भी करते हैं। शिव लिंग को पानी या गंगा जल और बेलपत्र चढ़ाने के बाद ही वे अपना उपवास तोड़ते हैं।

महिलाओं के लिए शिवरात्रि का विशेष महत्व है। अविवाहित महिलाएं भगवान शिव से प्रार्थना करती हैं कि उन्हें उनके जैसा ही पति मिले। वहीं विवाहित महिलाएं अपने पति और परिवार के लिए मंगल कामना करती हैं। शिवरात्रि के साथ कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं।

भगवान शिव को मन्त्र राज यानी मन्त्रो के रचयिता कहते है... इन्ही से मन्त्रो की उत्पत्ति हुयी है

अब जानते है कि महाशिवरात्रि के दिन क्या करे?

कुवारी कन्याये मन-पसंद वर की प्राप्ती के लिये आज के दिन शिव मन्दिर जाकर बेल पत्र चढाते हुये "ॐ नमः शिवाये" का ३२४ बार जाप करे. याद रखे "ॐ नमः शिवाय" का नही. ये मन्त्र माता पार्वती का है, इसलिये कुवारी कन्याओ की मनोकामना जल्दी पूरी होती है.

विद्यार्थियो के लियेः शिव मन्दिर जाकर भगवान शिव पर बेलपत्र चढाये और "ॐ नमः ॐ शिवाय" का ५१ बार जाप करे और मंदिर का ३ चक्कर लगाये. इससे उन्हे अध्यन मे आसानी होती है तथा विदेश मे अध्यन का योग प्रबल होता है.

  • कर्ज मुक्ति के लियेः ३ पंखुडियो वाले २१ बेलपत्र भगवान शिव को चढाये और "ॐ क्लीं पातु श्रीं रक्षा ॐ नमः" का ५४० मन्त्र यानी ५ माला जाप करे.
  • बच्चो की नजर बचाव के लियेः शिव मंदिर मे बेलपत्र चढाकर "ॐ अघोराय क्लीं ॐ शिवाय नमः" का जाप ३२४ बार या ३ माला जपे.
  • तंत्रबाधा से बचने के लियेः भगवान शिव को बेल पत्र चढाने के बाद वहा से चढाया हुआ एक बेलपत्र घर ले आये और उसे घर के मंदिर मे रखे. अब रात के १० बजे के बाद एक तांबे के लोटे मे पानी भरकर या गंगाजल भरकर बेल पत्र से "ॐ अघोरेश्वर क्लीं हुं नमः शिवाय" का जाप करते हुये अपने घर के चारो तरफ तथा अपने व अपने परिवार के ऊपर भी छिडकाव करे.
  • बिमारी जल्द ठीक होने के लियेः भगवान शिव के दर्शन के बाद वहा से ३ बेलपत्र लाकर "ॐ पाशुपतये हुं नमः शिवाय" ५४० बार या ५ माला जाप करे और बिमार ब्यक्ति के बिस्तर के नीचे सिर की तरफ रखे.
  • भौतिक सुख के लियेः भगवान शिव के दर्शन के बाद वहा से ३ बेल पत्र लेकर घर आये. और "ॐ केदारेश्वर क्लीं नमः शिवाय" ३२४ बार यानी ३ माला जाप करे और उस बेल पत्र को दुकान के गल्ले मे या तिजोरी मे रखे.
  • इस दिन पति-पत्नी को एक साथ मे जाकर शिव दर्शन करना चाहिये जिससे कि उनका दांपत्य जीवन सुखी रहे.
  • इसके अलावा इस दिन दिक्षा अवश्य लेनी चाहिये यानी कोई न कोई साधना का संकल्प अवश्य करना चाहिये. तथा इस दिन की गयी पूजा १० गुना ज्यादा फल देती है.

October 23, 2016

नरक चतुर्दशी

नरक चतुर्दशी का त्योहार हर साल कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को यानी दिवाली के एक दिन पहले मनाया जाता है। इस चतुर्दशी तिथि को छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन प्रातः काल स्नान करके यम तर्पण एवं शाम के समय दीप दान का बड़ा महत्व है।

पुराणों की कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि को नरकासुर नाम के असुर का वध किया। नरकासुर ने सोलह हजार कन्याओं को बंदी बना रखा था।

नरकासुर का वध करके श्री कृष्ण ने कन्याओं को बंधन मुक्त करवाया। इन कन्याओं ने श्री कृष्ण से कहा कि समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा अतः आप ही कोई उपाय करें। समाज में इन कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए सत्यभामा के सहयोग से श्री कृष्ण ने इन सभी कन्याओं से विवाह कर लिया।

नरकासुर का वध और १६००० कन्याओं के बंधन मुक्त होने के उपलक्ष्य में नरक चतुर्दशी के दिन दीपदान की परंपरा शुरू हुई। एक अन्य मान्यता के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान करके यमराज की पूजा और संध्या के समय दीप दान करने से नर्क के यतनाओं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इस कारण भी नरक चतु्र्दशी के दिन दीपदान और पूजा का विधान है।

इस दिन प्रत्येक कार्य मे सफलता पाने के लिये "ॐ गं श्रीं रीं ऐं क्लीं फट्" इस मन्त्र को कम से कम ३ माला यानी ३२४ बार जपे और शाम को दीप दान करे या घर के दक्षिण दिशा मे दीपक रखे.

October 15, 2016

Karva Chauth

Karwa Chauth is an ancient ritual used by Indian women residing in India and out. This festival is more well-liked in North India and as well with the Sikh community. On the day of Karwa Chauth, women observe a day lengthy fast and pray for the overall health and progress of their loved/ husbands. This ritual of enjoying Karva Chauth is mainly followed in the states of Uttar Pradesh, Haryana, Punjab, Gujarat, and Rajasthan, to name a few.

Before we go ahead and tell you what rituals to follow in this Karwa Chauth 2016, let's first understand the meaning of Karva Chauth.

The word Karwa means 'clay pot' and Chauth means 'fourth day'. The clay pot which is utilized through the rituals is a indication of wealth and happiness. Therefore, the name Karwa Chauth is given to this day.

This day chant 3 mala (324 mantra) for...

  • Protect your family
  • Protect your husband
  • Healthy family life
  • wealth development

Mantra:

  • || OM DHANVANTARE SARVA RAKSHAA KURU KURU NAMAHA ||
  • ॥ॐ धनवंतरे सर्व रक्षा कुरु कुरु नमः॥

August 12, 2016

Putrada Ekadashi

Putrada ekadashi Sunday 14th August 2016

Putrada Ekadashi, also referred to as Pavitropana Ekadashi and Pavitra Ekadashi, is a Hindu divine day, which falls on the eleventh lunar day (ekadashi) of the fortnight of the waxing moon in the Hindu month of Shravana (July–August).This present day is also generally known as Shravana Putrada Ekadashi, to distinguish it from the other Putrada Ekadashi in Pausha (December–January), and this is known as Pausha Putrada Ekadashi.

About this day, one day fasting is observed and praise is offered to the god (bhagawan) Vishnu (like other ekadashis) by both a married couple in particular, who don't to get a child for a very long time after marriage, to cause a male kid. This present day is particularly observed by Vaishnavas, followers of Vishnu.

A son is deemed completely vital in Hindu culture as he takes care of the parents in their old age in life and by offering shraddha (ancestor rites) makes sure well-being of his mother and father in the after-life. While each ekadashi is known for a separate name and is prescribed for certain objectives, the purpose of getting sons is so great that 2 Putrada ("giver of sons") ekadashi are dedicated to it. Rest of the goals don't enjoy this opportunity. Also it highlights the preference to get sons instead of girls.

Shravan Putrada ekadashi muhurth

  • Fast: Full day fast
  • Benefit: Child
  • God: Lord Vishnu

Perform below puja and sadhana

July 10, 2016

Guru Purnima, which falls on 19th July 2016, is the most auspicious day of the year; as it comes only once in a year. This day is filled with Happiness & Positive Vibes.

Guru Purnima is the day devoted to our Guru/Teacher. So you must take the blessings from your Guru on this day.

You should necessarily attain diksha/sadhana/puja from your Guru this day as it's effect get maximised by 10X times..

You can visit any temple with your family and worship the god. One must always think of positive things, happiness even of their enemies if any & should pray to god for success, fortune, good health & prosperity.

Guru Purnima yoga is deemed very auspicious for the following events:

    • Get any diksha.
    • Perform any sadhana.
    • Perform any puja/ anushthan/homam.

    1. On this day, visit nearby Lakshmi Temple and put a paper written with "REEM" 11 times on feet of mata Lakshmi for fulfilment of wishes.

    2. Chant "om reem shree mahalakshmeya namaha" for success in wealth.

    3. Chant "om kleem kleem paatu shreem raksha kuru kuru shreem namaha" for debt problems.

    4. If suffering from negativity or evil energy, Chant this mantra-

    || OM shreem kleem aing kreem hum fatt ||

    Chant these above mantra's 324 times (3 MALA).

    -*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*

    KUNDALINI DHYAN DIKSHA & SADHANA SHIVIR

    19th july 2016 at Dahisar

    Call 8652439844

    -*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*

June 12, 2016

Ambuvach festival 2016

अंबूवाची मेला

Ambubachi Fair, also referred to as Ambubasi festival, is performed yearly in the monsoon in the Kamakhya Mata Temple (mandir) at Guwahati, Assam. In 2016, the beginning date of Ambubachi Mela is June 22nd and the event ends on June twenty fifth. The Ambubachi event relevant to the Tantric cult and is also often known as Kamkhya Devi Pooja. It is believed that Mother Kamakhya goes through her menstrual period during these days and therefore the temple remains closed for 3 days.

Ambubachi Fair is also known as Ameti or Tantric fertility festival and is a four-day mela (fair). It is closely associated with the Tantric Shakti cult prevalent in eastern parts of India and is famed due to the assembling of Tantric Sadhus from India and abroad. Some of these Tantrik Babas will seem before public only during these 4 days.

The Tantrik Sanyasins also attract the media and foreigners. And Tantric Babas performing numerous unique rituals and exercises are photographed and published in magazines and newspapers around the world. Devotees come from remote places to meet the Tantric Sadhus and take their blessings. Apart from this, the festival is noted for its rural craft fair.

It is widely believed that Mother Kamakhya goes through her yearly menstrual cycle during the Ambubachi days. The temple (mandir) remains closed for three days – the menstruation period.

People in huge numbers wait outside the temple (mandir) on the fourth day, when the temple will be opened. Sanyasins and Pandas from around the country assemble at the Kamakhya temple during this period.

Large number of devoees (upasak) make a mad rush when the temple (mandir) reopens to receive the unique ‘prasad’ which is small bits of cloth, which is supposedly moist with the menstrual fluid of Mother Kamakhya. It is considered highly auspicious and powerful.

This day perform...

June 2, 2016

Guru Pushya yog 2016

Thursday 09 June 2016

On the list of propitious nakshatra among constellations, one of the luck increasing star, one of the wealth giving star is Pusya. When Pushya nakshatra falls on Thursday or guruwaar or veerwaar then it is known as "guru pushya yoga. This yoga is so much essential that religious disciples, tantric and other scholars wait for this fortunate day whole the year. When this auspicious time take place in shukla paksha then for sure implausible works are completed. Guru pushya nakshatra means when pushya nakshtara falls on a Thursday. This yoga is also called guru pushya amrit yoga.

Guru Pushya yoga is deemed very auspicious for the following events:

  • foundation stone laying of new building
  • learning mantra and tantra and acquisition of knowledge from father, grandfather, guru or a educated person
  • inaugural ceremony of new store / workplace
  • purchase of gold and jewellery is very auspicious
  • purchasing for a new vehicle
  • buying new house or shifting to new house
  • getting into big deals is deemed fruitful
  • Get diksha from guru
  • Get any puja service for success on this day

May 18, 2016

Bhadrakali ekadashi

(Apra ekadashi, Jyeshtha ekadashi) 1st june 2016

Bhadrakali Ekadasi is observed during on the eleventh day of the Krishna Paksha (dark fortnight) – waning phase of the moon – in the month of Jyeshta (May – June). Because the name indicates, it is devoted to Maata Mahakali and is mostly observed in Punjab, Haryana and Jammu and Kashmir In 2016, the date of Bhadrakali Ekadashi is June one.


It's thought that Maata Mahakali or Bhadra Kali made her divine attendance on earth to annihilate Adharma on the Bhadrakali Ekadashi day.

This Ekadasi is observed as Apara Ekadashi in other parts of India and by other communities. In Orissa, this Ekadasi is known as Jalakrida Ekadasi and is related to Lord (bhagwan) Jagannath.

It has to be noted that Bhadrakali Ekadashi has nothing to do with the Ekadasi fasting related to Lord (bhagwan) Vishnu (narayana).

Bhadrakali is a form of Mother Durga who is also called Shiddhitatri. She personifies the propitious power of time. The eleventh day of Krishna paksha (dark fortnight – the waning phase of moon) in the month of Jyeshtha is considered Her birthday. Therefore, Bhadrakali Ekadasi observed on this day. It is known as Jyeshta Ekadasi too. This amazing incarnation (avatar) points out the universal role of Bhadrakali and specific role of Mother Durga.

Mata Bhadrakali seems with baleful eyes, protruding tongue, and 4 arms carrying bloody sword in the upper left arm and severed heads of demons in the lower left arm. The top right arm looks in the mudra of providing bravery and the lower right arm in the mudra of conferring benefits. She adorns a garland of severed heads of demons and a belt of their dismembered arms. She is often shown in a divine lovemaking union with Lord shiva.

As Bhavtarini, the redeemer of the universe, She stands over the body Lord (bhagawan) shiva. In northern parts of India, Bhadrakali Ekadashi is deemed one of the most auspicious festivals according to shastra. It is said that Bhadrakali appeared on the eleventh day of Krishna paksha in Jyeshtha month to eliminate evil forces.

Perform/Get kali puja/sadhana/dikshaon Bhadra kali ekadashi and get below benefits....

  • Victory over enemy
  • Remove negative energy
  • Salvation
  • Protection from spirit
  • Protection from evil eye and black magic
  • Attraction power

Tags: bhadrakali ekadashi, apara ekadashi

April 29, 2016

Akshaya tritiya (Akha teej)

9th may 2016

Akshaya Tritiya, also known as Akha Teej, which falls on 9th May 2016 is a holy day for Hindus and Jains. It is an auspicious day of the birthday of Lord Parasurama who is the sixth Avatar of Lord Vishnu. This day has a lot of significance & is a highly beneficial event for performing any kinds of Spiritual Activities. Any Wealth Related Puja/Sadhana performed on this day will benefit & increase the success rate by 10× times.

You must perform any Mata Lakshmi related Sadhana/Puja/diksha on this day for getting Success in Wealth and Prosperity. So get all the essentials such as Sadhana Samagri, etc required in advance so that no hurdles can occur on the day of Puja or Sadhana. You can't afford to miss such a lucky and precious once in a year Muhurth.