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 May 24, 2017 

कामदेव अंतर त्राटक या कामदेव मानस ध्यान

आज हम जानेगे कि अपने अंदर कामदेव की क्षमता को कैसे लाये. कामदेव को हिंदू शास्त्रों में प्रेम और काम का देवता माना गया है। उनका स्वरूप युवा और आकर्षक है। इनकी पत्नी का नाम रति है इनका असर इतना तेज होता है कि बडे से बडा कवच भी इनके प्रभाव को रोक नही पाता. ये अपने प्रभाव से किसी भी मानव, रिषी, मुनी, देव-दानव, यक्ष, तथा संसार के सभी लोगो की तपस्या को भंग करने की क्षमता रखता है. इनके बहुत से नाम है जैसे मदन, अनंग, पुष्पवान, कंदर्प ईत्यादि. ये भगवान श्री कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के अवतार माने जाते है.

कामदेव के बारे मे एक कथा कही गयी है अपने पिता दक्ष के द्वारा भगवान शिव का अपमान करने के कारण माता सती ने वही यज्ञ कुंड मे अपने प्राण त्याग दिये. सती के वियोग मे भगवान शिव तपस्या मे लीन हो गये. वही सती दूसरे जन्म मे हिमवान की पुत्री पार्वती के रूप मे जन्म लिया. तब उन्होने भगवान शिव से विवाह करने के लिये भगवान शिव की आराधना शुरु की. लेकिन भगवान शिव की माता पार्वती की आराधना से कुछ भी फर्क नही पड रहा था, यह देखकर ब्रम्हा जी ने भगवान शिव की तपस्या को भंग करने के लिये व हृदय मे माता पार्वती के प्रति प्रेम जगाने के उद्देश्य से कामदेव को कैलास पर्वत भेजा, कामदेव ने भगवान शिव पर पुष्प बाण चलाया, जिससे शिवजी की तपस्या भंग हो गयी पर वे क्रोधित हो गये और गुस्से मे उनका तीसरा नेत्र खुल गया और देखते ही देखते कामदेव भस्म हो गये. यह देखकर कामदेव की पत्नि रति विलाप करने लगी, रोने लगी और भगवान शिव से उनके पति को जीवित करने की विनंती करने लगी. जब भगवान शिव का क्रोध शांत हुआ तब उन्होने रति से कहा कि वापस कामदेव को शरीर मे जीवित नही करूगा लेकिन ये लोगो के मस्तिष्क मे जीवित रहेगे.

यही कारण है कि कामेच्छा या काम की भावना लोगो के मस्तिष्क मे रहती है. अगर ये कामेच्छा निर्जीव हो जाय तब मानव भी निर्जीव जैसा ही हो जाता है.

आजके युग मे सुंदर दिखना कौन नही चाहता. चाहे वह स्त्री हो या पुरुष हो, हर ब्यक्ति चाहता है कि लोग उन्ही की सुने, उन्ही को माने, उन्ही को मान-सम्मान मिले, उन्ही को देखे. अगर हम पुरुष की बात करे तो पुरुष चाहता है सब स्त्री-पुरुष उसे देखकर, उसकी बातो को सुनकर तथा उससे मिलकर प्रभावित हो जाये. खासकर उनमे स्त्रियो को आकर्षित करने की चाहत ज्यादा रहती है. और स्त्री चाहती है कि उनका शरीर आकर्षक व सौंदर्य से भरा हो.सबके निगाहो मे वही हो.

इनमे से कुछ लोगो के अंदर प्राकृतिक रुप मे ये क्षमताये पहले से ही मौजूद होती है. इसलिये वे जिस क्षेत्र मे भी जाते है उस क्षेत्र मे अपना प्रभाव दूसरो पर डालते रहते है और तरक्की करते रहते है.... लेकिन बहुत बडी संख्या मे स्त्री और पुरुष के अंदर ये क्षमता नही होती. इससे वे अपने जीवन मे कुछ कमी महसूस करते रहते है. सही ढंग से तरक्की न कर पाने की वजह ये हीन-भावना के शिकार होने लगते है. और आज के प्रतिष्पर्धा से भरी दुनिया मे वे पिछडने लगते है.

आईये जानते है कि कामदेव का स्थान कहा-कहा पर होता है....

  • कामदेव का स्थान स्त्री मे होता है
  • सुंदर-सुगंधित फूलो मे
  • गीत मे
  • संगीत मे
  • पक्षियो कि मीठी-मीठी आवाज मे
  • बसंत के महीने मे
  • आकर्षक वस्त्रो मे
  • खूबसूरत आभूषणो मे
  • कामुक ब्यक्ति की संगति मे
  • शरीर मे कपडो के अंदर छुपे अंगो मे
  • मंद मंद हवा मे
  • सुण्दर स्थान मे
  • झरने के पास मे
  • इसके अलावा,,,,स्त्री मे खासकर ऑखे, माथा, भौहे, गाल तथा होठो पर कामदेव का विशेष स्थान माना जाता है.

अब हम बात करेगे कामदेव मानस ध्यान के लाभ की.

  • यह स्त्रियो को भरपूर यौवन प्रदान करता है
  • पुरुषो मे आकर्षक ब्यक्तित्व बनाता है
  • समाज में अपनी प्रतिष्ठा बढाने का मौका प्रदान करता है
  • आपकी बातो मे या हाव-भाव जबर्दस्त आकर्षण छुपा रहता है.
  • यह एंटी-एजिंग शक्ति प्रदान करता है यानी उम्र का प्रभाव शरीर पर कम होता है.
  • आपको सुंदर, आकर्षक दिखने मे मदत करता है.
  • हीन-भावना दूर कर आत्मविश्वास को बढाता है.
  • यौन क्षमता मे बृद्धी
  • यौन समस्या मे लाभ
  • गुप्त अंग की समस्या से लाभ
  • ठंडेपन की समस्या से लाभ

अब जानते है कि कामदेव अंतर त्राटक या कामदेव मानस ध्यान कैसे करे.

See Kamdev manas dhyan

एक शांत कमरे का चुनाव करे. दरवाजे की घंटी, मोबाईल फोन को बंद कर दे ढीले-ढाले वस्त्र पहने. एक कुर्सी पर या, जमीन पर आसन बिछाकर बैठ जाय. अपने ठीक सामने माता कामदेव की मुर्ती या चित्र को रखे. अब अपने आज्ञा चक्र को पिंच करे और कामदेव बीज मन्त्र "क्लीं कामदेवाय नमः" का उचारण १ मिनट तक करे. अब एकटक कुछ सेकेंड उस चित्र या मुर्ती को देखते रहे. और आख बंद कर ले, और उस मुर्ती को या चित्र को अपने आखो के सामने लाने का प्रयास करे. आप देखेंगे कि कुछ सेकेंड के लिये वह चित्र या मुर्ती आपके आखो के सामने दिखाई देगी, फिर गायब हो जायेगी. पहले दिन यह अभ्यास ५-६ मिनट तक करना है.

अब दूसरे दिन पुनः निश्चित समय पर अभ्यास शुरु करे. अब अपने दोनो आखो के बीच यानी आज्ञा चक्र पर पिंच करे और १ मिनट तक कामदेव बीज "क्लीं कामदेवाय नमः" का उच्चारण करे.. अब उस चित्र को या मुर्ती को अपने आखो के सामने लाने का पुनः अभ्यास करे....

इस तरह से आप देखेंगे कि जैसे-जैसे आपका अभ्यास बढता जायेगा वैसे - वैसे आखे बंद करने के बाद माता बगलामुखी का चित्र ज्यादा समय के लिये आपके सामने टिकना शुरु हो जायेगा. बस यही आपको चाहिये. जब आपका अभ्यास २१ से २५ दिन का हो जाय तो आप देखेंगे कि वह मुर्ती या चित्र आपकी आखो के सामने २ से ३ मिनट तक टिकना शुरु हो जायेगा.

याद रखे ये चित्र या मुर्ती शुरुवात मे सिर्फ कुछ सेकेंड के लिये ही आपके आखो के सामने दिखाई देगा. लेकिन जब २ से ३ मिनट तक दिखाई देने लगे तो यह मान कर चलिये कि आपने बहुत ही अच्छा अभ्यास किया है. ऐसा करने से कामदेव की जो खासियत है, या जो गुण है वह आपके अंदर आने शुरु हो जाते है. यानी आपकी बात-चीत का प्रभाव दूसरे होना शुरु हो जाता है, आपके चेहरे पर तेज आना शुरु हो जाता है. आप जिससे भी मिलेगे उसे आप प्रभावित कर देंगे. यह अभ्यास आप रोज करते रहे.

अब हम जानेंगे कि इसका उपयोग कैसे करते है.

अगर आपकी कोई मनोकामना है तो सबसे पहले चंदन की लकडी का छोटा टुकडा अपने हाथ मे ले और १ मिनट तक "क्लीं कामदेवाय नमः" का उच्चारण करे. जब कामदेव का प्रतिबिम्ब आपकी आखो के सामने आ जाय तब आप अपनी मनोकामना अपने मन मे करे. और वह चंदन का टुकडा घर के मंदिर मे रख दे.

याद रखे सिर्फ सही और उचित कार्य के लिये इस विधि का उपयोग करे, गलत नियत से किया गया कार्य नुकसान पहुचाता है. आगे और भी विधि है लेकिन यह बताई नही जा रही है.

अब कुछ जरूरी बाते....

  • कामदेव बहुत ही स्ट्रांग- पॉवरफुल देवता माने जाते है, इसलिये पूर्ण श्रद्धा होने पर ही इस विधि को अपनाये
  • इस अभ्यास मे जैसे-जैसे सफलता मिलती जायेगी वैसे-वैसे आपका स्वभाव मधुर होता चला जाना चाहिये
  • आपके स्वभाव मे घमंड आते ही इस अभ्यास का असर खत्म होना शुरु हो जाता है
  • कोई आपको बला-बुरा या गाली भी दे तो अपना नियंत्रण न खोये.
  • गलत नियत से कभी भी कोई कार्य न करे.
  • इस अभ्यास के द्वारा आप दूसरे की समस्या भी मदत कर सकते है.
  • इस अभ्यास मे दिक्षा की जरूरत नही होती.

आशा है आप इन विधियो को अपनायेंगे और अपने जीवन मे सफल होगे. इसलिये पूर्ण श्रद्धा के साथ अभ्यास करे

 May 24, 2017 

अप्सरा साधना और नियम

आज हम अप्सरा साधना तथा उसके नियम की बात करेगे ये सब जानकारी आपको सिर्फ ज्ञान बढाने के उद्देश्य से दिया जा रहा है. प्रत्येक धर्म मे यह कहा जाता है कि स्वर्ग मे जाने वालो को भोगविलास तथा दिव्यसुख की प्राप्ती होती है. अप्सराये उनका मनोरंजन करती है. यूनानी शास्त्रो मे अप्सराओ को "निफ" नाम से जाना जाता है. ये अत्यंत रूपवती और दिव्य शक्तियो से संपन्न होती है. इन अप्सराओ को इस्लाम मे "हूर" कहा गया है. इनका कार्य नृत्य, गायन, वादन कर सबका मनोरंजन करना होता है. ये अत्यंत खूबसूरत तथा भरपूर यौवन से भरी हुयी षोडस वर्षीया अप्सरा होती है. षोडस वर्षीया का अर्थ है कि १६ वर्ष के ऊपर न हो. इनके शरीर से निकलने वाली खुशबू लोगो को आकर्षित करती रहती है. ये अगर साधक के ऊपर प्रसन्न हो जाय तो उनको कभी धोखा नही देती और भरपूर सुख प्रदान करती रहती है. इसके अलावा इन्हे रिषी-मुनी की तपस्या को भंग करने के लिये भी भेजा जाता था. इनमे से प्रमुख अप्सराओ के नाम है रंभा, मेनका, तिलोत्तमा, उर्वशी. देखा जाय तो हमारे भारतीय समाज मे अप्सराये रूप और सौंदर्य की पर्याय बन चुकी है.

अब हम जानना चाहेगे कि इनकी साधना इस कलियुग मे लोग क्यो करते है?

जब भी कोई ब्यक्ति किसी देवी-देवता, यक्ष, गंधर्य, अपसरा की साधना करता है तो उनके गुण उस साधक मे आने शुरु हो जाते है जैसे कि...

अगर हम माता लक्ष्मी की साधना करते है तो लक्ष्मी के गुण जैसे बुद्धी का सही उपयोग, सही समय मे सही निर्णय लेना, भौतिक सुख, ब्यापार मे बृद्धी ईत्यादि गुण होने की वजह से यही गुण साधक को भी मिलने लगते है.

हनुमान की साधना करते है तो उनके गुण जैसे आत्मविश्वास, पराक्रम, शक्ति, विजय तथा ब्रम्हचर्य जैसे गुण होने की वजह से साधक को भी वही गुण मिलने लगते है.

इसी तरह से अप्सरा की साधना करने से उनके गुण जैसे कि रूप, सुंदरता, यौवन, हमेशा आनंद मे रहना, सौंदर्य, सम्मोहन, आकर्षण, हमेशा जवान दिखना ईत्यादि गुण होने की वजह से वही गुण साधक मे भी आने लगते है. इसीलिये आज के युग मे अप्सरा की साधना स्त्री तथा पुरुष करने लगे है.

See apsara sadhana rules

आईये जानते है क्या क्या लाभ मिलते है इस अप्सरा साधना से....

  • स्त्री तथा पुरुष मे आकर्षण शक्ति बढ जाती है
  • पुरुषो मे यौन क्षमता बढ जाती है
  • स्त्रियो को भरपूर यौवन की प्राप्ति होती है.
  • आपकी बातो मे या हाव-भाव जबर्दस्त आकर्षण छुपा रहता है.
  • यह एंटी-एजिंग शक्ति प्रदान करता है यानी उम्र का प्रभाव शरीर पर कम होता है.
  • आपको सुंदर, आकर्षक दिखने मे मदत करता है.
  • हीन-भावना दूर कर आत्मविश्वास को बढाता है.
  • यौन क्षमता मे बृद्धी
  • यौन समस्या मे लाभ
  • गुप्त अंग की समस्या से लाभ
  • ठंडेपन की समस्या से लाभ
  • शरीर मे आनंद, चेतना तथा स्फूर्ति बनी रहती है.
  • कला के क्षेत्र कार्य करने वालो के लिये ये साधना बहुत ही लाभकारी है.

अप्सरा साधना के नियम

  • अप्सरा साधना स्त्री पुरुष कोई भी संपन्न कर सकता है.
  • १८ वर्ष से लेकर ६०-७० वर्ष तक के ब्यक्ति अप्सरा साधना कर सकते है.
  • ये साधना किसी के मार्ग-दर्शन मे ही करे.
  • आखे बंद कर मंत्र जप करे
  • किसी जानकार गुरु से दिक्षा अवश्य प्राप्त कर ले.
  • इनकी साधना बीच मे न छोडे.
  • स्त्रियो को मासिक धर्म के कारण ३ दिन की छूट होती है.
  • साधना एक निश्चित समय पर ही शुरु करे. १०-१५ मिनट आगे पीछे चल जाता है.
  • साधना मे उपांशु जाप का प्रयोग करे यानी बुदबुदाकर जाप करे और आपके होठ हिलते रहने चाहिये.
  • जल्दबाजी न करे. साधना जितने दिन की बताई गयी है उतने दिन अवश्य करे.
  • कुछ साधको को बीच मे ही ऐसा लगता है कि साधना सफल हो गयी है इसलिये साधना रोके नही. अप्सराये परिक्षा भी लेती रहती है.
  • साधना के प्रति पूर्ण विश्वास होना जरूरी है
  • साधना के दौरान अपनी कामेच्छा पर नियंत्रण रखे. साधना मे वासना का कोई स्थान नही है इसलिये मन पर नियंत्रण रखे.
  • कई साधक अप्सराओ के साथ शारीरिक संबंध की कल्पना भी करने लगते है. इसलिये ऐसी भावनाओ से बचे क्योकि ऐसी भावनाये साधना को असफल बनाती है.
  • साधना के दौरान खुशबू आने का अहसास होता है
  • किसी को अपने आस-पास चलने का अहसास होता है. कुछ भी हो अपनी आख न खोले.
  • कहा जाता है कि जब तक अप्सरा द्वारा वचन न दिया जाय तब तक उसकी बातो पर विश्वास न करे.

आशा है कि ये नियम आपके लिये उपयोगी साबित होगे.

 May 10, 2017 

महाकाली अंतर त्राटक

माता काली महाविद्या मे पृथम महाविद्या मानी जाती है. माता काली आकर्षण- वशीकरण तथा शत्रु नाश की शक्ति साधक को प्रदान करती है, इसके अलावा महाकाली का साधक भौतिक रूप से संतुष्ट रहता है. क्योकि काली पृथम महाविद्या है इसलिये इनकी साधना आसान नही होती. गुरु से दिक्षा लेकर ३ से ५ लाख जप करके इसे सिद्ध किया जा सकता है. अगर अकेला ब्यक्ति इस साधना को सिद्ध करना चाहे है तो उसे कम से कम १ से २ साल तक का समय लग जायेगा. महाकाली साधना बहुत प्रभावशाली होती पर इसकी सिद्दी उतनी ही मुश्किल होती है.

त्राटक का अर्थ एकाग्रता होता है. त्राटक का यह नियम है कि जब आप जिस किसी वस्तु पर त्राटक करते है, तो उसकी खासियत या गुण को अपने अंदर ले लेते है. जैसे कि अगर आप अगरबत्ती पर त्राटक करेगे तो आप देखेगे कि आपकी आखो मे थोडा कचरा जमा हो गया है. वही आप मोमबत्ती पर त्राटक करेगे तो आप देखेगे कि आपकी आखो मे कुछ कचरा आ गया है. अब आप मिट्टी के तेल के दिये पर त्राटक करेगे तो आप देखेगे कि आपकी आखे कचरे-गंदगी से भर गयी है. वही अगर आप शुद्ध घी के दिये पर त्राटक करे तो आप देखेगे कि आपकी आखे स्वच्छ रहती है. कहने का अर्थ यह है कि आप जिस भी वस्तु पर त्राटक करेगे उसके गुण व दुर्गुण आपमे आ जायेगे.

इसलिये आज हम बात करेगे महाकाली मुर्ति त्राटक की. जो लाभ महाकाली की साधना करके पाया जा सकता है, वही लाभ काली मुर्ति पर त्राटक से या काली मानस ध्यान से प्राप्त किया जा सकता है.

अब जानते है काली अंतर त्राटक या काली मानस ध्यान से लाभ.

  • यह अंतर त्राटक आपके प्रभा-मंडल को बढाता है.
  • यह अंतर त्राटक आपके अदर की रोग-प्रतिरोधक को शक्ति को बढाता है.
  • इससे आपके अंदर आत्म-विश्वास व मन पर नियंत्रण बढता है,
  • तंत्र बाधा से सुरक्षा मिलती है.
  • आकर्षण शक्ति बढ जाती है.

अब जानते है कि काली अंतर त्राटक या काली मानस ध्यान कैसे करे.

एक शांत कमरे का चुनाव करे. दरवाजे की घंटी, मोबाईल फोन को बंद कर दे ढीले-ढाले वस्त्र पहने. एक कुर्सी पर या, जमीन पर आसन बिछाकर बैठ जाय. अपने ठीक सामने माता काली की मुर्ती या फोटो को रखे. अब अपने आज्ञा चक्र को पिंच करे और काली बीज मन्त्र "क्लीं" का उचारण १ मिनट तक करे. अब एक टक कुछ सेकेंड उस चित्र या मुर्ती को देखते रहे. और आख बंद कर ले, और उस मुर्ती को या चित्र को अपने आखो के सामने लाने का प्रयास करे. आप देखेंगे कि कुछ सेकेंड के लिये वह चित्र या मुर्ती आपके आखो के सामने दिखाई देगी, फिर गायब हो जायेगी. पहले दिन यह अभ्यास ५-६ मिनट तक करना है.

अब दूसरे दिन पुनः निश्चित समय पर अभ्यास शुरु करे. अब अपने दोनो आखो के बीच यानी आज्ञा चक्र पर पिंच करे और १ मिनट तक काली बीज "क्लीं" का उच्चारण करे.. अब उस चित्र को या मुर्ती को अपने आखो के सामने लाने का पुनः अभ्यास करे....

इस तरह से आप देखेंगे कि जैसे-जैसे आपका अभ्यास बढता जायेगा वैसे - वैसे आखे बंद करने के बाद माता काली का चित्र ज्यादा समय के लिये आपके सामने टिकना शुरु हो जायेगा. बस यही आपको चाहिये. जब आपका अभ्यास २० से २८ दिन का हो जाय तो आप देखेंगे कि वह मुर्ती या चित्र आपकी आखो के सामने २ से ३ मिनट तक टिकना शुरु हो जायेगा.

याद रखे शुरुवात मे सिर्फ कुछ सेकेंड के लिये ही आपके आखो के सामने दिखाई देगा. २ से ३ मिनट तक दिखाई दे रहा है तो यह मान कर चलिये कि आपने बहुत ही अच्छा अभ्यास किया है. ऐसा करने माता की जो काशियत है, या जो गुण है वह आपके अंदर आने शुरु हो जाते है. यानी आपकी बात-चीत का प्रभाव दूसरे होना शुरु हो जाता है,आप जिससे भी मिलेगे उसे आप प्रभावित कर देंगे. इसके आलवा शत्रु कोई षडयंत्र आपके खिलाफ रचते है, तो वे उसमे सफल नही होते. यहा तक कि आपके ऊपर तांत्रिक प्रभाव है, तो वह भी नष्ट होना शुरु हो जाता है.

See Kali Anter tratak

यह विधी बहुत ही प्रभावी है, इसलिये पूर्ण श्रद्धा के साथ अभ्यास करे.

 May 8, 2017 

तंत्र मे सफलता के लिये कामाख्या साधना

योनी साधना

तांत्रिको और अघोरियों के गढ़ माने जाने वाले कामाख्या पीठ तंत्र क्षेत्र का तीर्थ माना जाता है. असम की राजधानी दिसपुर से लगभग ७-८ किलोमीटर दूर स्थित है। वहां से १०-११ किलोमीटर दूर नीलाचंल पर्वत है। जहां पर माता कामाख्या देवी सिद्ध पीठ है। यही मंदिर मे तंत्र की शक्ति माता कामख्या विराजमान है. यह शक्ति-पीठ ५१ शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। माता कामाख्या को तंत्र की जननी कहा जाता है.

धर्म पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस जगह भगवान शिव का मां सती के प्रति मोह भंग करने के लिए विष्णु भगवान ने अपने चक्र से माता सती के 51 भाग किए थे जहां जहॉ पर माता का शरीर गिरा वहॉ-वहॉ शक्तिपीठ बन गया। इस तरह से ५१ शक्ति पीठ का निर्माण हुआ. इनमे से जिस जगह पर पर माता की योनि गिरी, वह स्थान कामाख्या पीठ कहलाया. इसलिये यहा योनी की पूजा होती है. योनी ही सृष्ठी का प्रवेश द्वार है. इसलिये योनी पूजा ही तंत्र मे सफलता पाने का द्वार माना जाता है. इसलिये साधू-योगी, तांत्रिको के अलावा देश-विदेश के तांत्रिक भी इस साधना को संपन्न करना अपने जीवन का ध्येय समझते है. इसलिये जीवन मे एक बार भी माता कामाख्या के दर्शन हो जाये तो आप इसे अपना सौभाग्य समझिये.

SEE VIDEO ON KAMAKHYA SADHANA

  • शिव चरित्र के अनुसार, सती शक्ति पीठों की संख्या ५१ मानी जाती हैं.
  • कालिका पुराण के अनुसार, सती शक्ति-पीठों की संख्या २६ मानी जाती हैं.
  • श्री देवी भागवत, पुराण के अनुसार, सती शक्ति-पीठों की संख्या १०८ मानी जाती हैं.
  • तंत्र चूड़ामणि तथा मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, सती शक्ति-पीठों की संख्या ५२ मानी जाती हैं.

बहुत कोशिश करने पर भी किसी साधक को तंत्र मे सफलता नही मिलती तो उसे माता कामाख्या की ही शरण मे ही आना होता है. जब कोई रास्ता न बचे तब इस साधना को संपन्न करना चाहिये. माता कामाख्या का नाम से कुछ लोगो मे डर है. मै याहा पर यही कहूगा कि ये माता डर दूर करने वाली मानी जाती है, ये आपको किसी भी प्रकार की तंत्र बाधा, नजर, नकारात्मक उर्जा तथा शत्रु से सुरक्षा प्रदान करती है. ये आपके पारिवारिक जीवन को खुशहाल बनाती है.

Kamakhya mantra;

ll त्रीं त्रीं त्रीं हूँ हूँ स्त्रीं स्त्रीं कामाख्ये प्रसीद

स्त्रीं स्त्रीं हूँ हूँ त्रीं त्रीं त्रीं स्वाहा ll

आईये अब जानते है कि माता कामाख्या की साधना के नियम क्या है?

  • इस साधना को स्त्री पुरुष कोई भी कर सकता है.
  • यह साधना २१ से ४१ दिनो की होती है.
  • रात का समय साधना करने के लिये शुभ होता है
  • इस साधना को शुरु करने के लिये कामाख्या दिक्षा गुरु से अवश्य लेना चाहिये.
  • इस साधना मे यंत्र, माला, गुटिका, कामाख्या श्रन्गार, कामाख्या सिंदूर, कामाख्या आसन ईत्यादि का उपयोग किया जाता है
  • साधना के प्रति व गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा होनी चाहिये.
  • साधना करने की प्रबल दिवानगी होनी चाहिये.
  • याद रखे जब भी साधना करने की इच्छा अपने मन मे करेगे, तुरंत अडचन आनी शुरु हो जायेगी, इसलिये अपनी संकल्प शक्ति को मजबूत रखिये.
  • इस साधना मे दक्षिण दिशा शुभ मानी जाती है.
  • इस साधना मे लाल कपडे का उपयोग करे.
  • साधना की सभी सामग्री कामाख्या मंत्र से प्राणप्रतिष्ठित होनी चाहिये.

आईये अब जानते है कि माता कामाख्या की साधना के लाभ क्या-क्या है?

  • हर तरह की नजर दूर हो जाती है
  • पति का संबंध अगर किसी दूसरी स्त्री से है तो वहा से वह वापस आने की संभावना बढ जाती है.
  • तंत्र के नकारात्मक प्रभाव दूर होने लगते है
  • पन-पसंद वर की प्राप्ती के लिये यह साधना बहुत ही उपयोगी है.
  • परिवार के क्लेश समाप्त होने लगते है.
  • वैवाहिक जीवन सुखमय हो जाता है.
  • पति-पत्नि एक दूसरे से हमेशा वफादार रहते है.
  • बडे से बडे तांत्रिक प्रभाव को भी इस साधना के द्वारा नष्ट किया जा सकता है.
  • शत्रु अपने षडयंत्र मे कामयाब नही होते.
  • घर मे सुख-शांती लौट आती है.
  • ब्यापार तथा दुकान धंधे मे की गयी तंत्र बाधा समाप्त हो जाती है.
  • आप इस साधना के द्वारा जरूरत मंद ब्यक्ति की मदत भी कर सकते है.

See Kamakhya Sadhana with Diksha

ये साधना आप कही से भी संपन्न कर सकते है. आशा है कि आप इस साधना को आजमायेगे तथा माता कामाख्या के आशिर्वाद के साथ अपने घर-परिवार को सुरक्षित व खुशहाल रखेगे.

 May 4, 2017 

कर्ण पिशाचिनी साधना

भूतकाल-वर्तमान काल की घटना को जाने!

रहस्यमयी कर्ण पिशाचिनी विद्या- एक ऐसी विद्या जिसकी सिद्धी कर ली जाय तो सामने वाले ब्यक्ति का भूतकाल व वर्तमान काल को जाना जा सकता है. यह एक ऐसी साधना है जिसे सिद्ध करने के लिये हर क्षेत्र के लोग लालायित रहते है. इसकी साधना दो पद्धति से की जाती है, पहला है तंत्र मार्ग से तथा दूसरा है वाम मार्ग से.

एक आम ब्यक्ति चाहे वह ग्रहस्थ हो या किसी भी क्षेत्र से जुडा हो तंत्र मार्ग से कर्ण पिशाचिनी साधना कर सकता है. और वाम मार्ग से कर्ण पिशाचिनी की साधना करना सिर्फ औघड यानी अघोरियो को ही इजाजत होती है. एक आम ब्यक्ति वाम मार्ग से साधना नही कर सकता. वह तभी साधना कर सकता जब वह ग्रहस्थ जीवन का त्याग कर चुका हो. और उसे वाम मार्ग की दिक्षा मिली हो.

तो आज हम बात करेगे तंत्र मार्ग की..... लोगो के मन मे कर्ण-पिशाचिनी के प्रति बेहद डर की भावना भरी हुयी है कि उन्हे कही कोई नुकसान न हो जाये. . लेकिन सही मार्ग-दर्शन मे, गुरु के दिशा-निर्देश मे यह साधना की जाय तो बिना नुकसान के सफलता भी मिल जाती है. योग्य गुरु कर्ण-पिशाचिनी के मंत्र मे विशिष्ठ बीज मंत्र मिलाकर देते है जिससे इससे नुकसान की संभावना समाप्त हो जाती है. यह साधना पारलौकिक शक्तियों को अपने वश में करने के लिये जानी जाती है. इस साधना के द्वारा ब्यक्ति की बहुत ही ब्यक्तिगत जानकारी भी हासिल की जा सकती है, इसलिये साधक को गुरु से कर्ण-पिशाचिनी साधना की संपूर्ण विधि को समझकर ही साधना की शुरुवात करनी चाहिये.

See Karana-pishachini sadhana

See Karna pishachini sadha with diksha

आईये अब जानते है कि कर्ण-पिशाचिनी साधना के लिये क्या करे या क्या न करे.

  • सबसे पहले कर्ण-पिशाचिनी साधना की दिक्षा किसी योग्य जानकार ब्यक्ति से लेनी चाहिये, जिससे कि आप उनके मार्ग-दर्शन मे साधना संपन्न कर सके.
  • साधना काल मे स्त्री से संबंध न रखे. यानी पूर्ण ब्रम्हचर्य रखे.
  • इस साधना को स्त्री और पुरुष दोनो ही कर सकते है.
  • साधना काल मे तीखी-मिर्च-मसालो को अपने भोजन से दूर रखे.
  • ब्यसन-धूम्रपान तथा मद्यपान से दूर रहे.
  • साधना के दौरान मांसाहारी भोजन से दूर रहे.
  • स्त्रियो के लिये मासिक-धर्म के दौरान साधना वर्जित है इसलिये ३ दिन साधना रोककर चौथे दिन से साधना शुरु करे.
  • याद रखे इस कर्ण-पिशाचि्नी साधना को साधक देवी के रूप मे मानकर साधना करे.
  • इस साधना का समय सूरज डूबने के बाद का होता है.
  • जो साधना सामग्री का उपयोग कर रहे है, ध्यान रखे कि वह प्राणप्रतिष्ठित होनी चाहिये.
  • इस साधना मे यंत्र, माला, गुटिका, श्रंगार, आसन, कवच ईत्यादि का उपयोग किया जाता है.
  • यह साधना २१ से ४१ दिन की होती है.
  • नियमित व एक ही जगह पर साधना संपन्न करे, साधना की जगह को बदले नही.
  • इस साधना के प्रति अपनी पूरी श्रद्धा बनाये रखे.
  • इस साधना की जानकारी हमेशा गुप्त रखे.
  • आप इस साधना को नही मानते यह अच्छी बात है पर मजाक मे इस साधना को कभी न ले.
  • आप इस साधना के प्रति गंभीर हो तभी इस साधना की तरफ बढे.
  • इस साधना का उपयोग गलत नीयत से कभी न करे.

यह साधना वही ब्यक्ति कर सकता है जो निडर हो और गंभीरता से साधना करना चाह रहा हो. नीचे डिस्क्रिप्शन मे इस साधना की सामग्री का लिंक दिया गया है, आशा है कि आप इस रहयमयी व अलौकिक साधना को सीखकर समाज मे अच्छे कार्य करेंग

 May 2, 2017 

पंचांगुली साधना के रहस्य

पंचांगुली साधना - इसे हम पंचांग की देवी की साधना भी कह सकते है, यह एक ऐसी विद्या है जो मनुष्य की चैतन्य शक्ती को जाग्रत कर देती है. जिससे वह सामने वाले के मष्तिष्क व विचारो से जुडने लगता है. और भविष्य के अज्ञात रहस्य उसके सामने खुलने शुरु हो जाते है. इस पंचांगुली विद्या को प्रमुख रूप से प्रचारित करने वाले रिषी कणाद, अंगिरस व अत्रेय माने जाते है. आज के युग मे भी लोग इस पंचांगुली साधना को सिद्ध कर रहे है. हर मनुष्य के मन मे भविष्य जानने की उत्सुकता बनी रहती या भविष्य के गर्भ मे जाने की व जानने की ललक बनी रहती है. वह चाहता है कि कोई ऐसी ब्रम्हांड की शक्ति से वह जुड जाय कि किसी की भी ब्यक्ति के भूत- भविष्य- वर्तमान को जान सके.

आज बहुत सी पद्ध्तिया आ चुकी है जो कि भूत- भविष्य- वर्तमान का ज्ञान कराती है. जैसे एस्ट्रोलोजी, पामेस्ट्री, नंबरोलोजी, रमल शास्त्र, टैरो कार्ड रीडिंग, स्वर शास्त्र, कौडी विज्ञान इसके अलावा बहुत सी पद्धतिया प्रचलित है.

माता पंचांगुली काल ज्ञान की देवी है. इनकी साधना की सिद्धी के द्वारा साधक को आने वाली दुर्घटना या होने वाली दुर्घटना का अहसास होने लगता है. तथा पंचांगुली साधना के द्वारा ब्यक्ति... ज्योतिष, पामेस्ट्री, न्यूम्रोलोजी, रमल शास्त्र, टैरो रीडिंग, प्लानचेट, कौडी विज्ञान मे पारंगत हो जाता है. अगर आप किसी ब्यक्ति को अध्यात्मिक उपचार करते है जैसे रेकी हीलिंग, प्राणिक हीलिंग, डिस्टेंस हीलिंग, फोटो थेरिपी, टेली पैथी. ...... तो आप देखेंगे कि इस साधना को सिद्ध करने के बाद आपकी उपचार करने की क्षमता १० गुना ज्यादा बढ जाती है. इसके अलावा जब भी आप सामने वाले ब्यक्ति को कोई राय - उपाय या मशवरा देते है, तो आप देखेंगे कि आपके दिये हुये उपाय उस ब्यक्ति के लिये अचूक होते है.

See about Panchanguli sadhana

अब पृश्न यह उठता है कि ऐसा क्यो होता है तो यहा पर यही कहा जा सकता है कि ब्रम्हांड की उर्जा आपके मष्तिष्क के माध्यम से सामने वाले ब्यक्ति के मष्तिष्क से जुडने लगती है. जब सामने वाला ब्यक्ति आपसे कोई पृश्न करता है उस समय आप सामने वाले ब्यक्ति के बारे मे सोचे तो तुरंत ही उस ब्यक्ति का ब्यवहार व स्वभाव का अंदाज आना शुरु हो जाता है. ऐसे समय आप अपने बारे मे उसके मन मे पॉजीटिव व निगेटिव विचारो को भी जान सकते है. जिससे आप उस ब्यक्ति से सतर्क रह सकते है. और इसके अलावा उस ब्यक्ति के पूछे गये पृश्न के समाधान मे आप जो भी उपाय उसे बतायेगे वह उस ब्यक्ति के लिये अचूक होगा. यहा तक की आप किसी मीटिंग या बिजनेस संबंधित मीटिंग मे बैठे है तो इस साधना के द्वारा आपको सामने वाले के मन मे अपने प्रति निगेटिव या पॉजीटिव विचारो को पढना आसान हो जाता है. जैसे यह आपको कही बिजनेस मे धोका तो नही देगा या फसाने की कॉइ चाल तो नही है? इस सब बातो का अंदाज आ जाता है. इससे आप बडे नुकसान से बच जाते है.

कहने का अर्थ यही है कि पंचांगुली साधना के द्वारा आप अपनी अध्यात्मिक क्षमता व उपचार करने की क्षमता को बढा सकते है. आपकी इंट्यूशन पॉवर बढ जाती है. मेरी राय मे जितने भी एस्ट्रोलॉजर, हीलर, अध्यात्मिक उपचार करने वाले लोग है, उन्हे यह साधना अवश्य करनी चाहिये तथा समाज मे लोगो की मदत करनी चाहिये

 May 1, 2017 

साधना सिद्धी के नियम जाने!

मंत्र साधना मे अथाह शक्ति है लेकिन इसके साथ ही कुछ नियम भी है, अगर इस नियम का पालन विधिवत करते है तो सफलता निश्चित मिलती है. अगर नियम का पालन नही किया जाय तो सफलता की जगह नुकसान होने की संभावना बनी रहती है. इसलिये गुरु के मार्ग-दर्शन और साधना के नियम का पालन कर आप सफलता प्राप्त कर सकते है. विधिवत की गई साधना से इष्‍ट देवता की कृपा बनी रहती है

आइये आज जानते है साधना के नियम जिसका पालन कर आप सफलता प्राप्त कर सकते है.

Know more about Sadhana rules

  • जिस देवी-देवता या जिस किसी भी ईष्ट की आप साधना करना चाहते हो, उनके प्रति पूरी आस्था होनी चाहिये.
  • साधना काल मे ब्रम्हचर्य रहना अनिवार्य है.
  • कामुक किताबे-फिल्मे नही देखना चाहिये.
  • साधना करने की आपकी प्रबल ईच्छा होनी चाहिये.
  • साधना करने के आपमे पूरी दिवानगी होनी चाहिये.
  • साधना का जो समय दिया गया है, उसी निश्चित समय पर ही साधना करनी चाहिये. ५-१० मिनट आगे-पीछे हो सकता है, लेकिन यह कोशिश करे कि साधना समय पर शुरु कर पाये.
  • साधना का स्थान बदले नही.
  • साधना काल मे मन बहुत ही विचलित हो जाता है, तथा कामवासना भी तेज हो जाती है इसलिये सतर्क रहे.
  • आपकी साधना मे विघ्न आये इसलिये कुछ आवाजे भी सुनाई देती है, जैसे कि कोई आपको बाहर बुला रहा हो, इसलिये मन पर नियंत्रण रखे व साधना को छोडे नही.
  • साधना का समय दोपहर या रात को हो तो भी स्नान कर साधना की शुरुवात करे, चाहे एकबार सुबह नहा चुके हो तो भी आप नहाकर साधना मे बैठे.
  • साधना काल मे अपना मोबाईल तथा दरवाजे की घंटी बंद रखे.
  • ब्यसन- धुम्रपान-मद्यपान से दूर रहना चाहिये.
  • साधना काल मे मिर्च-मसाले, खटाई, मांसाहार से दूर रहे.
  • अपनी वाणी पर नियंत्रण रखे.
  • साधना काल मे जमीन पर चटाई बिछाकर लेटे.
  • कुछ साधना मे न्यास भी किये जाते है, उसकी जानकारी अपने गुरु से अवश्य ले ले.
  • साधना करने के पहले गुरु से उस साधना की दिक्षा अवश्य ले ले.
  • साधना मे मंत्र जपने के पहले एक - एक माला गुरु मन्त्र और गणेश मन्त्र को अवश्य जपने चाहिये. फिर ध्यान करना चाहिये.
  • ध्यान मे जिस भी देवी-देवता या ईष्ट की साधना करने जा रहे है उनका ध्यान कर साधना मे सफलता का आशिर्वाद अवश्य मागना चाहिये.
  • साधना करते समय व साधना के बाद भी साधना की जानकारी लोगो मे गुप्त रखे.
  • एक समय मे एक ही साधना करनी चाहिये. साधना समाप्त होने पर गुरु से आज्ञा लेकर दूसरी साधना की शुरुवात कर सकते है.
  • साधना काल मे हुआ अनुभव सिर्फ आप अपने गुरु से या जहा से दिक्षा प्राप्त की है, उनसे कह सकते है.
  • साधना समाप्त होने पर दशांश हवन तथा अन्नदान अवश्य करना चाहिये. दशांश हवन का अर्थ यह है कि जितने भी मंत्र साधना काल मे जपे है उसका दसवॉ भाग हवन करना होता है.
  • जो मन्त्र आप जप रहे थे उसके आगे "स्वाहा" लगाकर आहुति देनी चाहिये या हवन करना चाहिये. जैसे अगर आप "ॐ महालक्ष्मेय नमः" का जाप कर रहे थे, तो हवन करते समय "ॐ महालक्ष्मेय नमः स्वाहा" बोलकर हवन करना होगा.
  • साधना मे बार-बार असफल हो रहे हो तो गुरु से उस साधना मन्त्र का उत्कीलन मन्त्र अवश्य लेना चाहिये,
  • सफलता प्राप्त करने के लिये साधना के पहले पुनश्चरण जाप भी कर लेना चाहिये. यानी साधना शुरु करने के १ या २ दिन पहले एक-एक घंटे उस मन्त्र का जाप कर लेना चाहिये.

 April 25, 2017 

अक्षय तृतीया के दिन को किये उपाय कभी भी बेकार नही जाते!

वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आखा तीज या अक्षय तृतीया मनाई जाती है. हमारे शास्त्रानुसार अक्षय तृतीया के दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। अक्षय का मतलब जिसका कभी क्षय न हो. जो कभी नष्ट न हो. इस दिन सारे शुभ कार्य किये जा सकते है. इस दिन पंचाग, मुहुर्थ देखने की जरूरत नही होती. इस दिन किसी कार्य की शुरुवात अगर कर दी जाय तो सफलता १० गुना अघिक मिलने की संभावना बन जाती है. शास्त्रो के अनुसार यह दिन सौभाग्य और सफलता का सूचक है

आईये जानते है कि कौन -कौन से कार्य करे, जिससे सफलता मिले. सबसे पहले जानेगे कि सामान्यतः कौन- कौन से कार्य कर सकते है, फिर जानेगे कि जो अध्यात्मिक क्षेत्र मे है या साधक है उन्हे क्या करना चाहिये.

See what to do on akshay tritiya

  • आज के अपने आस-पास के किसी भी मंदिर मे जाकर जाने-अंजाने किये पापो का प्रायच्छित करना चाहिये.
  • पति-पत्नि को साथ मे मंदिर मे दर्शन के लिये जाना चाहिये.
  • पति-पत्नि एक साथ जाकर ही आभूषण खरीदना चाहिये.
  • अक्षय तृतीया के दिन सगाई- मंगनी- विवाह शुभ माना जाता है.
  • तृतीया माता गौरी की तिथी मानी जाती है, इसलिये सुखमय ग्रहस्थ जीवन के लिये शिव परिवार की पूजा अवश्य करे.
  • अगर विवाह मे अडचने आ रही हो तो एक नारीयल लेकर माता गौरी का ध्यान कर अपनी मनोकामना अपने मन मे करे और उस नारियल को पीपल के पेड के नीचे रख दे.ऐसा करने से विवाह की बाधाये दूर होने लगती है.
  • इस दिन सभी विघ्नो को दूर करने के लिये रुद्राभिषेक अवश्य करवाये.
  • इसी दिन शनि का दान अवश्य करे यानी काला तिल, तिल का तेल और एक सिक्का, जिसका वजन ढाई किलो के करीब होना चाहिये. इस दिन ये दान करने शनि का प्रकोप शांत हो जाता है तथा कार्यो मे होने वाली अडचने कम हो जाती है.
  • इस दिन लक्ष्मी मंत्र "ॐ रीं महालक्ष्मेय नमः" का जाप ५४० बार यानी ५ माला अवश्य जपे. इस मंत्र को कोई भी जप सकता है लेकिन पति-पत्नि मिलकर ही इस मंत्र को जपे.
  • इस दिन मन-पसंद वर की प्राप्ती के लिये कात्यायनी मंत्र "ॐ क्लीं कात्यायने नमः" का ५४० बार या ५ माला अवश्य जप करे तो मनपसंद वर की प्राप्ती होती है.
  • इस दिन कोई अध्यात्मिक वस्तु यंत्र, मुर्ती या कोई भी अध्यात्मिक वस्तु खरीदना चाहिये.

अब जानते जो उपासक या साधक है, उन्हे क्या करना चाहिये.

  • आज के दिन लक्ष्मी या भौतिक सुख संबंधित कोई भी दिक्षा अवश्य लेनी चाहिये.
  • साधना की शुरुवात भी इसी दिन से कर सकते है.
  • आज के दिन पंचागुली साधना शुभ मानी जाती है.

अक्षय तृतीया के दिन का सदुपयोग करे, उसे गवाये नही. यह मानकर चले कि इस दिन किया गया कार्य फल जरूर देता है. इस दिन अच्छे कर्म करे, मधुर ब्यवहार रखे, यथा शक्ति लोगो की मदत करने की कोशिश करे.

 April 15, 2017 

ध्यान मे तुरंत कैसे जाये!

इस भौतिक युग मे मनुष्य प्रदूषण, प्रतिस्पर्धा, कम समय मे ज्यादा पैसा कमाने की चाहत तथा काम के अत्यधिक दबाव के कारण तनाव, मानसिक थकान, अनिद्रा तथा असुरक्षा की भावना से ग्रसित रहता है. इससे उसके शरीर पर भी दुस्प्रभाव पडता है. ऐसे मे वह अगर नियमित ध्यान करे तो उसके मस्तिष्क को नई ताकत मिलती है. तथा हर तरह के तनाव व थकान का अहसास समाप्त होना शुरु हो जाता है. उसे गहरी नींद से भी अघिक लाभ सिर्फ ध्यान से ही प्राप्त हो जाता है.

तो आईये जानते है ध्यान की सामान्य तथा तुरंत लाभ देने वाली विधी को.

See how to do easy meditation

एक शांत कमरे का चुनाव करे. अब आप कुर्सी पर या सोफे पर या पलंग पर बैठ जाय. अपने मन को शांत रखे. इसके लिये ५ बार प्राणायाम करे यानी गहरी श्वास खीचे.... जितनी देर तक हो सके रोके ....... फिर धीरे- धीरे छोडे. इस तरह से ५ प्राणायाम करे. अब अपने श्वास को सामान्य रखे. और अपने श्वास पर ध्यान केंद्रित करे. शुरुवात मे आपका ध्यान भटक जायेगा. तो फिक्र न करे फिर से श्वास पर ध्यान केंद्रित करे. अब जैसे जैसे श्वास पर ध्यान देते जायेगे ... वैसे - वैसे आप महसूस करेगे कि आपकी श्वास की गती धीमी होती जा रही है. इस तरह से यह अभ्यास सिर्फ ५ मिनट तक करे. आप देखेंगे कि कुछ दिन मे आपके अंदर जबर्दस्त परिवर्तन आना शुरु हो जाता है.

यह अभ्यास आप काम पर जाने के पहले, नौकरी पर जाने के पहले, दुकान पर जाने के पहले करे जिससे आपका पूरा दिन आपका मन शांत व प्रफुल्लित रहता है. यह अभ्यास कोई भी उम्र का स्त्री-पुरुष- बच्चा कर सकता है. इस अभ्यास को सुबह के अलावा रात को भी कर सकते है. रात को अभ्यास करने पूरे दिन का तनाव व मानसिक थकान दूर हो जाता है. यानी इस अभ्यास को सुबह काम पर जाने के पहले और रात को सोने के पहले कर सकते है.

 April 14, 2017 

ध्यान शक्ति से लाभ

ध्यान से लाभः नियमित ध्यान या मेडीटेशन करने से अनेको लाभ प्राप्त होते है. ध्यान के अभ्यास से मन तनाव मुक्त, शरीर की रक्षा प्रणाली मे मजबूती, प्रबल स्मरणशक्ति तथा शरीर की नस-नाडियॉ चैतन्य होनी शुरु होती है जिससे बुढापे की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. तथा सातो चक्र बैलेंस हो जाते है या संतुलित हो जाते है.

अब हम जानेगे कि ध्यान से शारीरिक लाभ क्या-क्या मिलते है.

Know more about "Meditation benefits"

ध्यान से शारीरिक लाभ :

  • इस अभ्यास से शरीर मे ऑक्सीजन की मात्रा बढती है.
  • इस अभ्यास से सांस की रफ्तार कम होती है, जिससे हृदय को मजबूती मिलती है.
  • शरीर मे रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे शरीर चैतन्य रहता है.
  • ध्यान से पूरे शरीर को आराम मिलता है.
  • ध्यान से रक्तचाप ब्लडप्रेशर के रोगियो को लाभ मिलता है.
  • ध्यान से खून मे खराबी का स्तर कम खून को साफ रखता है.
  • शरीर में नसो को आराम मिलता है
  • त्वचा संबंधी बिमारियो मे लाभ होता है.
  • मासिक धर्म की समस्याओ मे लाभ मिलता है.
  • बिमारी के बाद ध्यान का अभ्यास करने शरीर सामान्य अवस्था मे जल्दी आ जाता है.
  • शरीर मे बिमारी से लडने की क्षमता को बढाता है.
  • ध्यान अभ्यास से शरीर मे ऊर्जा, शक्ति और उत्साह बढ़ता है.
  • वजन घटाने में मदद करता है
  • ध्यान से कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होकर हृदय रोग मे लाभ मिलता है
  • इस अभ्यास से फेफडो को आराम मिलता है.
  • ध्यान से उम्र बढ़ने की गति कम हो जाती है.
  • ध्यान से पुरानी बीमारियों पर नियंत्रण या धीमा किया जा सकता है.
  • ध्यान से आधा-शीशी यानी माईग्रेन मे आराम मिलता है.
  • ध्यान करने मष्तिश्क अच्छी तरह से कार्य करता है.
  • ध्यान के द्वारा आप अपनी खेल गतिविधियों मे बेहतर प्रदर्शन क सकते है.
  • ध्यान से अस्थमा के रोगी को आराम मिलता है.
  • ध्यान द्वारा अपने वजन नॉर्मल लाने मे मदत मिलती है.
  • ध्यान से अनिंद्रा की समस्या से लाभ मिलता है.

ध्यान से मनोवैज्ञानिक लाभ :

  • ध्यान से आत्मविश्वास बढता है.
  • ध्यान से मूड यानी व्यवहार प्रभावित होता है.
  • ध्यान से हर प्रकार के डर को दूर करने मे मदत मिलती है.
  • एकाग्रता बढ जाती है.
  • ध्यान से रचनात्मक शक्ति बढ जाती है.
  • ध्यान से स्मरणशक्ति मे लाभ मिलता है.
  • ध्यान से सीखने की क्षमता बढती है.
  • ध्यान के अभ्यास से बिगडे रिश्तो को बेहतर करने मे मदत मिलती है.
  • ध्यान से अंतर्मन की शक्ति बढती है.
  • मन पर नियंत्रण होने से छोटी-छोटी बातो को अनदेखी करने की क्षमता मिलती है.
  • जटिल समस्याओ का समाधान संयम से करने की क्षमता आ जाती है.
  • ध्यान से सहनशीलता बढ जाती है.
  • ध्यान से मिलनसार स्वभाव बन जाता है
  • ध्यान से व्यसन छोडने मे मदत मिलती है.
  • ध्यान से दवाईयो पर निर्भरता कम हो जाती है.
  • ध्यान से क्रोघ पर नियंत्रण होने लगता है.
  • ध्यान से परिवार के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ जाती है.
  • ध्यान से सही निर्णय लेने की क्षमता बढ जाती है.

ध्यान के आध्यात्मिक लाभ :

  • ध्यान मन को खुशी व शांती प्रदान करता है.
  • ध्यान के अभ्यास से जीवन मे अपने उद्देश्य को खोजने मे मदत मिलती है.
  • ध्यान के अभ्यास से लोगो के प्रति दया-प्रेम की भावना बढ जाती है.
  • ध्यान के अभ्यास से स्वयं तथा दूसरो को समझने मे मदत मिलती है.
  • मन मे अध्यात्मिक शांती मिलती है.
  • अपने ईश्वर के प्रति आस्था बढ जाती है.
  • इस अभ्यास से अहंकार दूर होकर दयालू स्वभाव बन जाता है.

आशा है कि आप ध्यान के लाभ जानकर ध्यान का अभ्यास जरूर करेगे.

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