Uchchhishtha Ganesha Tara sadhana

शिवानंद दास जी के मार्गदर्शन मे

उच्छिष्ठ गणेश तारा साधना शिविर

Uchchhishtha Ganesha Tara Sadhna Shivir

(Sat+Sun) 7th -8th Sept. 2019 at Vajreshwari near mumbai.

माता तारा सौंदर्य व ऐश्वर्य की देवी मानी जाती है. सबसे पहले महर्षि वशिष्ठ ने मा तारा की सिद्धी प्राप्त की थी. फिर वामाखेपा इनके प्रिय साधको मे थे. ये माता शत्रुओ का नाश करने वाली, सौंदर्य व रूप को निखारने वाली, संपूर्ण रूप से ऐश्वर्य व सुख-सुविधा, भोग व आर्थिक उन्नति देने वाली मानी जाती है. इनके साथ ही जब उच्छिष्ठ गणेश की उपासना की जाये तो कोई भी कार्य व मनोकामना निष्फल नही होती.

इसलिये इस उच्छिष्ठ गणेश तारा साधना शिविर मे १२५००० से लेकर ५५०००० तन जप हवन का अनुष्ठान होगा. इसमे भाग लेना किसी सौभाग्य से कम नही है. इसलिये एक बार अवश्य जरूर इस शिविर मे भाग लेकर अपनी सभी प्रकार की मनोकामनाओ को पूर्ण कर अनुभव प्राप्त करे!

UCHCHHISHTHA GANESHA TARA SADHANA BOOKING

Pickup point-(8am) Hotel Hardik place, opp mira road railway station east. Mira road.

Shivir Location- https://goo.gl/maps/AWUTZNAyjky

Fees 7500/- Including- Sadhana samagri (Siddha Ganesha Tara Yantra, Siddha Ganesha Tara mala, Siddha Ganesha Tara parad gutika, Siddha Ganesha Tara asan, Siddha Chirmi beads, Gomati chakra, Tantrokta nariyal, siddha kaudi, Siddha Rakshasutra, Siddha Rudraksha and more.) + Ganesha Tara Diksha by Guruji+ Room Stay with Complementary Breakfast, Lunch, Dinner. (Husband-wife 10000/-)

Call for booking- 91 9702222903/ 7710812329.

Ganesh Dwadashnam Stotra


श्री गणेश द्वादश नाम स्तोत्रं

Lord (bhagawan) Ganesha is a remover of obstacles. Ganesha is a God of Intellect and knowledge . He's the God of beginnings and is honoured at the begin of rituals and ceremonies. This dwadash Naam stotram of Lord (bhagawan) Ganesh removes troubles and obstacles before doing any fortunate ceremony.

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तयेः ॥ 1 ॥

अभीप्सितार्थ सिध्यर्थं पूजितो यः सुरासुरैः ।
सर्वविघ्नहरस्तस्मै गणाधिपतये नमः ॥ 2 ॥

गणानामधिपश्चण्डो गजवक्त्रस्त्रिलोचनः ।
प्रसन्नो भव मे नित्यं वरदातर्विनायक ॥ 3 ॥

सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः ।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः ॥ 4 ॥

धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो फालचन्द्रो गजाननः ।
द्वादशैतानि नामानि गणेशस्य तु यः पठेत् ॥ 5 ॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी विपुलं धनम् ।
इष्टकामं तु कामार्थी धर्मार्थी मोक्षमक्षयम् ॥ 6 ॥

विध्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा ।
सङ्ग्रामे सङ्कटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ॥ 7 ॥

॥ इति मुद्गलपुराणोक्तं श्रीगणेशद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥