Bagalamukhi Temple

DONETION FOR CONSTRUCTION OF BAGALAMUKHI TEMPLE & YOG ASHRAM


Divyayogaashram is planning to construct Maa Pitambara Devi Temple (also known as Mata Bagalamukhi) at near Vajreshwari. However, this dream of Guruji won't become a reality without the help of our people. Thus, we strongly look forward to your support in this visionary project. You can make the donation through Bank Transfer, PayTM & UPI.


दिव्य योग आश्रम की तरफ से मुंबई के पास वज्रेश्वरी के निकट माता बगलामुखी जिसे हम माता पीताम्बरा के नाम से भी जानते है, इस मंदिर के निर्माण मे आपके सहयोग की आवश्यकता है. आप अपना सहयोग पेटीएम, बैंक ट्रांसफर, यूपीआई से कर सकते है

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ICICI BANK. AC NO- 002801019934. AC NAME- S D ASHRAM CHARITABLE TRUST

BRANCH- BHAYANDER WEST

IFSC CODE- ICIC0000028

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UPI- [email protected] . Paytm- 7710812329

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Donate by Credit card/Debit card- DONATE NOWFor Bagalamukhi temple


(Note: Your donation will be eligible for Tax deduction under *SECTION 80G.)

Akshaya patra lakshmi

शिवानंद दास जी के मार्गदर्शन मे

अक्षय पात्र लक्ष्मी साधना शिविर

Akshaya Patra Lakshmi Sadhna Shivir

(Sat+Sun) 25th -26th July 2020 at Vajreshwari near mumbai.


माता लक्ष्मी के अनेको स्वरूप होते है और अक्षय पात्र लक्ष्मी मे माता के सभी स्वरूप समाहित रहते है. इसलिये अक्षय पात्र लक्ष्मी के उपासक के लक्ष्मी की कृपा से अनेको स्रोतो से धन की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही धन से संबंधित सभी तरह के विवाद, कर्ज, दुकान -धंधे की रुकावट नष्ट होकर सुख-्समृद्धि की प्राप्ति होती है.

यह प्रयोग तांबे के कलश मे संपन्न करवाया जाता है. जो कि जीवन भर काम आता है. इसी अक्षय पात्र कलश पर १२५००० से लेकर ५५०००० तक जप हवन का अनुष्ठान होगा. इसमे भाग लेना किसी सौभाग्य से कम नही है. इसलिये एक बार अवश्य जरूर इस शिविर मे भाग लेकर अनुभव जरूर प्राप्त करे!


AKSHAY PATRA LAKSHMI SADHANA BOOKING


Pickup point-(8am) Hotel Hardik place, opp mira road railway station east. Mira road.


Shivir Location- https://goo.gl/maps/AWUTZNAyjky


Fees 8000/- Including- Sadhana samagri (Siddha Akshay patra lakshmi Yantra, Siddha Akshay patra lakshmi mala, Siddha Akshay patra lakshmi parad gutika, Akshay patra lakshmi asan, Siddha Chirmi beads, Gomati chakra, Tantrokta nariyal, siddha kaudi, Siddha Rakshasutra and more.) + Akshay patra lakshmi Diksha by Guruji+ Room Stay with Complementary Breakfast, Lunch, Dinner. (Husband-wife 12000/-)

Call for booking-91 7710812329/ 91 9702222903

Hanuman Bajarang Baan

Hanuman Bajarang Baan in Hindi

हनुमान बजरंगबाण

भगवान हनुमान को हर प्रकार की शक्ती का देवता मना जाता है। घर-परिवार की हर समस्या, आत्नविश्वास की कमी, भूत-प्रेत की समस्या, नजत की समस्या, मन की चंचलता, स्वास्थय, सुरक्षा, सुखमय जीवन के लिये इनकी साधना, आराधना होती रहती है। प्रतिदिन 'हनुमान बजरंगबाण' का पाठ करने वाले भक्तों को जीवन भर किसी भी वस्तु की कमी नहीं होती है। इसके अलावा इन भक्तों के घर-परिवार में सदैव सुख-शांति बनी रहती है।

दोहा

निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ।।

चौपाई

जय हनुमन्त सन्त हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।।
जन के काज विलम्ब न कीजै । आतुर दौरि महा सुख दीजै ।।
जैसे कूदि सुन्धु वहि पारा । सुरसा बद पैठि विस्तारा ।।
आगे जाई लंकिनी रोका । मारेहु लात गई सुर लोका ।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा । सीता निरखि परम पद लीन्हा ।।
बाग़ उजारी सिन्धु महं बोरा । अति आतुर जमकातर तोरा ।।
अक्षय कुमार मारि संहारा । लूम लपेट लंक को जारा ।।
लाह समान लंक जरि गई । जय जय धुनि सुरपुर में भई ।।
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी । कृपा करहु उन अन्तर्यामी ।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता । आतुर होय दुख हरहु निपाता ।।
जै गिरिधर जै जै सुखसागर । सुर समूह समरथ भटनागर ।।
जय हनु हनु हनुमंत हठीले । बैरिहि मारु बज्र की कीले ।।
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो । महाराज प्रभु दास उबारो ।।
ऊँ कार हुंकार महाप्रभु धावो । बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ।।
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा । ऊँ हुं हुं हनु अरि उर शीशा ।।
सत्य होहु हरि शपथ पाय के । रामदूत धरु मारु जाय के ।।
जय जय जय हनुमन्त अगाधा । दुःख पावत जन केहि अपराधा ।।
पूजा जप तप नेम अचारा । नहिं जानत हौं दास तुम्हारा ।।
वन उपवन, मग गिरि गृह माहीं । तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।।
पांय परों कर ज़ोरि मनावौं । यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।
जय अंजनि कुमार बलवन्ता । शंकर सुवन वीर हनुमन्ता ।।
बदन कराल काल कुल घालक । राम सहाय सदा प्रति पालक ।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर । अग्नि बेताल काल मारी मर ।।
इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की । राखु नाथ मरजाद नाम की ।।
जनकसुता हरि दास कहावौ । ताकी शपथ विलम्ब न लावो ।।
जय जय जय धुनि होत अकाशा । सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा ।।
चरण शरण कर ज़ोरि मनावौ । यहि अवसर अब केहि गौहरावौं ।।
उठु उठु उठु चलु राम दुहाई । पांय परों कर ज़ोरि मनाई ।।
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता । ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ।।
ऊँ हं हं हांक देत कपि चंचल । ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल ।।
अपने जन को तुरत उबारो । सुमिरत होय आनन्द हमारो ।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै । ताहि कहो फिर कौन उबारै ।।
पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करैं प्राम की ।।
यह बजरंग बाण जो जापै । ताते भूत प्रेत सब कांपै ।।
धूप देय अरु जपै हमेशा । ताके तन नहिं रहै कलेशा ।।

दोहा

प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ।।

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