Lakshmi-Kuber Sadhana Shivir

शिवानंद दास जी के मार्गदर्शन मे

लक्ष्मी- कुबेर आकर्षण साधना शिविर

Lakshmi-Kuber Sadhna Shivir

(Sat+Sun) 26th -27th Jan 2019 at Vajreshwari near mumbai.

धन व जमीन जायदाद का सुख प्राप्त करने के लिये लक्ष्मी कुबेर साधना से बढकर कोई साधना नही होती. माता लक्ष्मी रुपये-पैसो की देवी मानी जाती है वही कुबेर धन के रक्षक व संसार की सभी अचल संपत्ति के स्वामी माने जाते है. अगर इन दोनो का अनुष्ठान एक साथ किया जाय तो सभी प्रकार के सुखो की प्राप्त होने लगती है. इसलिये इस लक्ष्मी- कुबेर साधना शिविर मे भाग लेना भी किसी सौभाग्य से कम नही है. इसलिये एक बार अवश्य जरूर इस शिविर मे भाग लेकर अनुभव जरूर प्राप्त करे!


LAKSHMI-KUBER SADHANA BOOKING


Fees 7500/- Including- Sadhana samagri (Siddha Lakshmi-kuber Yantra, Siddha Lakshmi-kuber mala, Siddha Lakshmi-kuber parad gutika, Siddha Lakshmi-kuber asan, Lakshmi shrangar, Siddha Chirmi beads, Gomati chakra, Tantrokta nariyal, White kaudi, Siddha Rakshasutra, haldi ganesh, Siddha Rudraksha and more.) + Lakshmi-kuber Diksha by Guruji+ Room Stay with Complementary Breakfast, Lunch, Dinner. (Husband-wife 10000/-)


Call for booking- 91 8652439844


Past-life Regression

शिवानंद दास जी के मार्गदर्शन मे


2 Days


PAST-LIFE REGRESSION SEMINAR

Sat+Sun (12th-13th Jan. 2019) 10am to 6pm at Grand Hotel, Malad west- Mumbai


पिछले जीवन मे जाने की कला. इस कोर्स के द्वारा दूसरे ब्यक्ति को उसके पिछले जीवन मे ले जाकर इस जीवन मे आने वाली समस्याओ का समाधान खोज सकते है.


Explore yourself इसमे आप सीखेंगे.. हिप्नॉसिस+ त्राटक + रिग्रेशन मैथड + मनोविज्ञान


Past-life Regression Seminar Booking


Fees 8000/- Including- Course materials with Complimentary Breakfast, Lunch, Tea.

Call for booking- 91 8652439844 (Separate batch for doctor)

Hanuman Bajarang Baan

Hanuman Bajarang Baan in Hindi

हनुमान बजरंगबाण

भगवान हनुमान को हर प्रकार की शक्ती का देवता मना जाता है। घर-परिवार की हर समस्या, आत्नविश्वास की कमी, भूत-प्रेत की समस्या, नजत की समस्या, मन की चंचलता, स्वास्थय, सुरक्षा, सुखमय जीवन के लिये इनकी साधना, आराधना होती रहती है। प्रतिदिन 'हनुमान बजरंगबाण' का पाठ करने वाले भक्तों को जीवन भर किसी भी वस्तु की कमी नहीं होती है। इसके अलावा इन भक्तों के घर-परिवार में सदैव सुख-शांति बनी रहती है।

दोहा

निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ।।

चौपाई

जय हनुमन्त सन्त हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।।
जन के काज विलम्ब न कीजै । आतुर दौरि महा सुख दीजै ।।
जैसे कूदि सुन्धु वहि पारा । सुरसा बद पैठि विस्तारा ।।
आगे जाई लंकिनी रोका । मारेहु लात गई सुर लोका ।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा । सीता निरखि परम पद लीन्हा ।।
बाग़ उजारी सिन्धु महं बोरा । अति आतुर जमकातर तोरा ।।
अक्षय कुमार मारि संहारा । लूम लपेट लंक को जारा ।।
लाह समान लंक जरि गई । जय जय धुनि सुरपुर में भई ।।
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी । कृपा करहु उन अन्तर्यामी ।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता । आतुर होय दुख हरहु निपाता ।।
जै गिरिधर जै जै सुखसागर । सुर समूह समरथ भटनागर ।।
जय हनु हनु हनुमंत हठीले । बैरिहि मारु बज्र की कीले ।।
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो । महाराज प्रभु दास उबारो ।।
ऊँ कार हुंकार महाप्रभु धावो । बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ।।
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा । ऊँ हुं हुं हनु अरि उर शीशा ।।
सत्य होहु हरि शपथ पाय के । रामदूत धरु मारु जाय के ।।
जय जय जय हनुमन्त अगाधा । दुःख पावत जन केहि अपराधा ।।
पूजा जप तप नेम अचारा । नहिं जानत हौं दास तुम्हारा ।।
वन उपवन, मग गिरि गृह माहीं । तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।।
पांय परों कर ज़ोरि मनावौं । यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।
जय अंजनि कुमार बलवन्ता । शंकर सुवन वीर हनुमन्ता ।।
बदन कराल काल कुल घालक । राम सहाय सदा प्रति पालक ।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर । अग्नि बेताल काल मारी मर ।।
इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की । राखु नाथ मरजाद नाम की ।।
जनकसुता हरि दास कहावौ । ताकी शपथ विलम्ब न लावो ।।
जय जय जय धुनि होत अकाशा । सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा ।।
चरण शरण कर ज़ोरि मनावौ । यहि अवसर अब केहि गौहरावौं ।।
उठु उठु उठु चलु राम दुहाई । पांय परों कर ज़ोरि मनाई ।।
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता । ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ।।
ऊँ हं हं हांक देत कपि चंचल । ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल ।।
अपने जन को तुरत उबारो । सुमिरत होय आनन्द हमारो ।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै । ताहि कहो फिर कौन उबारै ।।
पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करैं प्राम की ।।
यह बजरंग बाण जो जापै । ताते भूत प्रेत सब कांपै ।।
धूप देय अरु जपै हमेशा । ताके तन नहिं रहै कलेशा ।।

दोहा

प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ।।

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