PANCHANGULI SADHANA

शिवानंद दास जी के मार्गदर्शन मे

2 days

Panchanguli sadhana shivir vajreshwari

Sat+Sun (21st-22nd Dec.2019) at Vajreshwari. Near Mumbai

125000 to 50000 Mantra jap and Purnahuti

इन लोगो के लिये सबसे ज्यादा लाभदायक है जो इस क्षेत्र मे कार्य कर रहे है. जैसे कि ज्योतिष, अंकशास्त्र, हस्तरेखा शास्त्र, रमल शास्त्र, टेरोकार्ड, फेंग्शुई, वास्तु, रेकी हीलिंग, प्रानिक हीलिंग, टेलीपैथी, डिस्टेंस हीलिंग, फोटो थेरिपी, तंत्र-मंत्र साधक, व हर तरह के अध्यात्मिक उपचार करने वालो के लिये पंचांगुली साधना अनिवार्य मानी जाती है.

Pickup point-(8am) Hotel Hardik place, opp mira road railway station east. Mira road.

Shivir Location- https://goo.gl/maps/AWUTZNAyjky

PANCHANGULI SADHANA BOOKING

Fees 7500/- Including- Sadhana samagri (Panchanguli Yantra, Panchanguli mala, Panchanguli parad gutika, Panchanguli asan, Panchanguli shrangar, Siddha Chirmi beads, Gomati chakra, Tantrokta nariyal, White kaudi, Siddha Rakshasutra, Siddha Rudraksha and more.) + Panchanguli Diksha by Guruji+ Room Stay with Complementary Breakfast, Lunch, Dinner. (Husband-wife 10000/-) Call for booking- 91 9702222903/7710812329

Sita (janaki) navami pujan

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पौराणिक शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को पुष्य नक्षत्र के मध्या काल में जब महाराजा जनक संतान ..
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सीता नवमी पूजन

Sita Navami- Monday 27th April 2015

Sita Navami- Sunday 15th may 2016

Sita Navami- Thursday 4th may 2017

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को पुष्य नक्षत्र के मध्या काल में जब महाराजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल से भूमि जोत रहे थे, उसी समय पृथ्वी से एक बालिका का प्राकट्य हुआ।

जोती हुई भूमि तथा हल के नोक को भी 'सीता' कहा जाता है। इसलिए बालिका का नाम 'सीता' रखा गया था। अत: इस पर्व को 'जानकी नवमी' भी कहते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है एवं राम-सीता का विधि-विधान से पूजन करता है, उसे 16 महान दानों का फल, पृथ्वी दान का फल तथा समस्त तीर्थों के दर्शन का फल मिल जाता है।

दिव्ययोगशॉप के विशिष्ठ पंडित विधि-विधान से सीता नवमी पूजन संपन्न करते है। इसमे पृथम गणेश पूजन के साथ गौरी, शिव तथा कार्तिकेय की पूजा संपन्न की जाती है। तत्पश्चात सीता नवमी पूजन के बाद हवन संपन्न किया जाता है। इस पूजा से सुख सम्रुधी प्राप्त होती है। कष्ट दुर होते है। ग्रहस्थ जीवन मे शांती मिलती है।

सीता नवमी पूजन सामग्रीः

सीता आरती बुक

अनघा गुटिका

३ गोमती चक्र

सिद्ध सीता फोटो

सीता माला

तांत्रोक्त सीता नारियल

सीता नवमी पूजन की संपूर्ण विधि

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