BAGALAMUKHI SADHNA SHIVIR

शिवानंद दास जी के मार्गदर्शन मे

बगलामुखी साधना शिविर

BAGALAMUKHI SADHANA SHIVIR

(Sat+Sun) 26-27 NOV. 2022 at Vajreshwari near Mumbai.


मुंबई के निकट वज्रेश्वरी मे माता बगलामुखी की विशेष साधना शिविर का आयोजन होने जा रहा है ये शिविर ४० वर्षो मे 11वी बार होने जा रहा है. ये महाविद्या होने की वजह से इनकी शक्ती अत्यंत तीव्र होती है. ये चारो दिशाओ से ब्यक्ति की सुरक्षा करती है. इनकी वजह से परिवार का एक एक सदस्य सुरक्षित माना जाता है. इनकी उपासना से मनुष्य के सभी पाप बुरे कर्म नष्ट होकर कर सभी मनोकामना पूर्ण होती है. इस माता की कृपा से मनुष्य तेजी से तरक्की करता है छिपे शत्रु से सुरक्षा मिलती है. शत्रु पर तेजी से विजय प्राप्त होती है. आपका नौकरी ब्यापार सुरक्षित हो जाता है. हर तरह की नकारात्मक उर्जा, रोग, जलन, विघ्न संतोषियो से आपकी रक्षा होती है. माता की कृपा से धन की रुकावट दूर होने लगती है साथ ही हर तरह का विवाद क्लेष नष्ट होकर पारिवारिक शांती मिलनी शुरु हो जाती है.


इसमें भाग लेने के दो तरीके है एक तो शिविर मे आकर साधना में भाग ले सकते है दूसरा आप ऑनलाइन भी भाग ले सकते हैं. अगर आप भाग लेना चाहते हैं तो नीचे लिंक दिया है वहां पर फॉर्म भरकर आप शिविर मे शामिल हो सकते है


BAGALAMUKHI SADHANA SHIVIR- BOOKING


Fees- 8000/- & Online Proxy 6500/- Including Sadhana samagri (Siddha Bagalamukhi Yantra, Siddha Bagalamukhi mala, Siddha Bagalamukhi gutika, Bagalamukhi asan, Siddha Chirmi beads, Gomati chakra, siddha kaudi, Siddha Rakshasutra and more.) + Bagalamukhi Diksha by Guruji+ Room Stay with Complementary Breakfast, Lunch, Dinner. (Husband-wife 13000/-) (Pay 2000/- booking and balance pay on shivir)


Call for booking-91 7710812329/ 91 9702222903


अगर आप भाग लेना चाहते हैं तो नीचे डिस्क्रिप्शन में लिंक दिया है वहां पर फॉर्म भरकर आप इस शिविर मे शामिल हो सकते हैं

Narak chaturdashi pujan

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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियाँ जल में डालकर स्नान करने से नरक से...
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नरक चतुर्दशी पूजन

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियाँ जल में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है। विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो स्वर्ग को प्राप्त करते हैं। कुछ जगहों पर यह पर्व छोटी दीपावली के रूप में तथा अधिकांश स्थानों पर हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कुबेर की भी पूजा की जाती है। इस तिथि को रूप चैदस के रूप में भी मनाने की परंपरा है। प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर तुंबी (लौकी) को सिर से घुमाने के बाद स्नाना करने से रूप और सौंदर्य बना रहता है तथा लोग नरकगामी होने से भी बच जाते हैं। यह भी मान्यता है कि भगवान ने इसी दिन वामन के रूप में अवतार लिया था। इस दिन दान आदि करने से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन निशामुखी वेला में दीपदान भी करना चाहिए।

दिव्ययोगशॉप के विशिष्ठ पंडित विधि-विधान से नरक चतुर्दशी पूजन संपन्न करते है। इसमे पृथम गणेश पूजन के साथ गौरी, शिव तथा कार्तिकेय और कुबेर की पूजा संपन्न की जाती है। तत्पश्चात नरक चतुर्दशी पूजन के बाद हवन संपन्न किया जाता है। इस पूजा से धन तथा अचानक धन प्राप्ती होती है। शत्रुंयो से सुरक्षा मिलती है।

नरक चतुर्दशी पूजन सामग्रीः

विष्णु आरती बुक

विष्णु गुटिका

३ गोमती चक्र

सिद्ध विष्णु फोटो

विष्णु माला

तांत्रोक्त विष्णु नारियल

नरक चतुर्दशी पूजन की संपूर्ण विधि

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