Lakshmi-Kuber Sadhna Shivir

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हमारे हिन्दू धर्म में धन की देवी माता लक्ष्मी और धन के देवता भगवान कुबेर माने जाते हैं। इस लिये कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) एवं दीपावली पर मां लक्ष्मी के साथ धनके देवता एवं नव निधिओं के स्वामी भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती हैं...
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लक्ष्मी- कुबेर साधना शिविर

Lakshmi-Kuber Sadhna Shivir

Sunday 26th May 2013. 11am to 6pm

At Agrasen Bhuvan, 90 feet road, Ghatkoper E Mumbai

हमारे हिन्दू धर्म में धन की देवी माता लक्ष्मी और धन के देवता भगवान कुबेर माने जाते हैं। इस लिये कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) एवं दीपावली पर मां लक्ष्मी के साथ धनके देवता एवं नव निधिओं के स्वामी भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती हैं। लक्ष्मी एवं कुबेर कि पूजा से व्यक्ति कि समस्त भौतिक मनोकामनाएं पूर्ण होकर धन-पुत्र इत्यादि कि प्राप्ति होती हैं। क्योकि आज के भौतिकता वादी युग में मानव जीवन का संचालन सुचारु रुप से चल सके इस लिये धर्म - अर्थ - काम - मोक्ष मे से अर्थ (धन) सबसे महत्व पूर्ण साधन हैं। अर्थ (धन) के बिना मनुष्य जीवन दुःख, दरिद्रता, रोग, अभावों से पीडित होता हैं। अर्थ (धन) से युक्त मनुष्य जीवन में समस्त सुख-सुविधाएं भोगता हैं।


कुबेर दशो दिशाओं के दिक्पालों में से एक उत्तर दिशा के अधिपति देवता हैं। कुबेर मनुष्य कि सभी भौतिक कामनाओं को पूर्ण कर धन वैभव प्रदान करने में समर्थ देव हैं। इसलिए कुबेर कि पूजा-अर्चना से उनकी प्रसन्नता प्राप्त कर मनुष्य सभी प्रकार के वैभव (धन) प्राप्त कर लेता हैं। धन त्रयोदशी एवं दीपावली पर कुबेर कि विशेष पूजा-अर्चना कि जाती हैं जो शीघ्र फल प्रदान करने वाली मानी जाती हैं। वैसे तो इस कलियुग मे प्रत्येक मनुष्य धन की कामना करता है, इसलिये धन की चाहत करने पर तामसिक धन की ही प्राप्ती होती है । यह धन संतुष्टी प्रदान नही करता, मनुष्य मे घमंड पैदा कर देता है। परंतु जो मनुष्य धन प्राप्ति कि कामना करने के साथ सुखी जीवन, संतुष्ट जीवन की भी कामना करते है ऐसे व्यक्ति को ही धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष का लाभ मिलता है, और उन पर माता लक्ष्मी-कुबेर की कृपा बराबर बनी रहती है। लक्ष्मी की पृवत्ति चंचल होती है, उसे सिर्फ कुबेर के द्वारा ही आबद्ध (स्थिर) किया जा सकता है।

इस लक्ष्मी- कुबेर साधना शिविर (घाटकोपर) मे भाग लेना भी किसी सौभाग्य से कम नही है, इसमे पहली बार गुरुदेव द्वारा लक्ष्मी-कुबेर दिक्षा प्रदान की जायगी।

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