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Shitala mata sadhana

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चैत्र कृष्ण अष्टमी को आद्याशक्ति स्वरूपा मां शीतला का पूजन किया जाता है। माता शीतला बच्चों की रक्षक हैं तथा रोग दूर करती हैं। प्राचीन काल में जब आधुनिक चिकित्सा विधि अस्तित्व में नहीं थी
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Shitala mata sadhana for health

रोग मुक्ति के लिये माता शीतला देवी साधना

चैत्र कृष्ण अष्टमी को आद्याशक्ति स्वरूपा मां शीतला का पूजन किया जाता है। माता शीतला बच्चों की रक्षक हैं तथा रोग दूर करती हैं। प्राचीन काल में जब आधुनिक चिकित्सा विधि अस्तित्व में नहीं थी, तब शीतला यानी चेचक की बीमारी महामारी के रूप में फैलती थी। उस समय ऋषियों ने देवी की उपासना एवं साफ-सफाई के विशेष महत्व को बताया।

माता शीतला का प्राचीनकाल से ही बहुत अधिक माहात्म्य रहा है। स्कंद पुराण के अनुसार शीतला देवी का वाहन गर्दभ बताया गया है। ये हाथों में कलश, सूप, मार्जन (झाडू) तथानीम के पत्ते धारण करती हैं। इन्हें चेचक आदि कई रोगों की देवी बताया गया है। इन बातों का प्रतीकात्मक महत्व होता है। चेचक का रोगी व्यग्रता में वस्त्र उतार देता है। सूप से रोगी को हवा की जाती है, झाडू से चेचक के फोड़े फट जाते हैं। नीम के पत्ते फोडों को सड़ने नहीं देते। रोगी को ठंडा जल प्रिय होता है अत: कलश का महत्व है। गर्दभ की लीद के लेपन से चेचक के दाग मिट जाते हैं। माता शीतला देवी के मंदिरो में प्राय: माता शीतला को गर्दभ पर ही आसीन दिखाया गया है।

शीतला माता के संग ज्वरासुर- ज्वर का दैत्य, ओलै चंडी बीबी - हैजे की देवी, चौंसठ रोग, घेंटुकर्ण- त्वचा-रोग के देवता एवं रक्तवती - रक्त संक्रमण की देवी होते हैं। इनके कलश में शीतल स्वास्थ्यवर्धक एवं रोगाणु नाशक जल होता है।

स्कन्द पुराण में इनकी अर्चना का स्तोत्र शीतलाष्टक के रूप में प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र की रचना भगवान शंकर ने लोकहित में की थी। शीतलाष्टक शीतला देवी की महिमा गान करता है, साथ ही उनकी उपासना के लिए भक्तों को प्रेरित भी करता है।

मान्यता अनुसार इस व्रत को करनेसे शीतला देवी प्रसन्‍न होती हैं और साधक के परिवार में दाहज्वर, पीतज्वर, विस्फोटक, दुर्गन्धयुक्त फोडे, नेत्रों के समस्त रोग, शीतलाकी फुंसियों के चिन्ह तथा शीतलाजनित दोष दूर हो जाते हैं।

होली के पश्चात आने वाले प्रथम सोमवार, गुरुवार, और शुक्रवार के दिन माता का पूजन किया जाता है। शीतला माता की उपासना घातक व्याधि से मुक्ति के लिए होती है। माता ज्वर, फोड़े-फुंसियों, नेत्रों से सम्बन्धित विकार आदि दोषों से मुक्त करती हैं। ऐसी मान्यता है कि माता शीतला इस साधना/ व्रत/पूजा से प्रसन्न होकर बच्चों की रक्षा करती हैं।

माता शीतला देवी साधना के लाभ

  • त्वचा रोग मे लाभ
  • हैजा मे लाभ
  • रक्त संक्रमण से बचाव
  • चेचक से बचाव
  • बुखार मे लाभ
  • बच्चे को नजर से बचाव
  • पूरे परिवार को बिमारी से बचाना

माता शीतला देवी साधना सामग्री

  • शीतला माता यन्त्र
  • शीतला माता रोग मुक्ति माला
  • शीतला माता विग्रह
  • शीतला माता आसन
  • रक्षासूत्र
  • सिद्ध लघु नारियल
  • शीतला माता साधना मन्त्र
  • शीतला माता साधना की संपूर्ण विधी

शितला माता साधना मुहुर्थ

  • साधना समयः सुबह ४ बजे से ८ बजे के बीच
  • दिशाः पूर्व
  • मन्त्र जापः ११ माला रोज
  • साधना अवधिः ७ दिन
  • सावधानीः घर मे तेल की चीजे न बनाये

यह साधना पुरुष या स्त्री कोई भी संपन्न कर सकता है.

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