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Ekjata vashikaran sadhana

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एकजटा माता तारा का ही स्वरूप है, माता एकजटा प्रबल वशीकरण के लिये जानी जाती है. इस साधना से प्रेम प्रकरण, प्रेमी या प्रेमिका का रूठ जाना, पति या पत्नी का रूठ जाना, व्यसायिक रूप मे ग्राहको को आकर्षित करना ई. मे सफलता प्राप्त की जाती है...
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एकजटा वशीकरण साधना

एकजटा माता तारा का ही स्वरूप है, माता एकजटा प्रबल वशीकरण के लिये जानी जाती है. इस साधना से प्रेम प्रकरण, प्रेमी या प्रेमिका का रूठ जाना, पति या पत्नी का रूठ जाना, व्यसायिक रूप मे ग्राहको को आकर्षित करना ई. मे सफलता प्राप्त की जाती है.

“एक जटा” नाम से ही प्रतीत होता है जो तीनो भावो को बाँधने वाली है. माता भगवती तारा के इस रूप में उनके केशो बारे में उनकी वेणी के बारे में गहन चिंतन मनन किया है. केशो के हर भाग के बारे में बारीकी से अध्ययन करने पर इन तीन तत्वों का रहस्य उजागर हो पाया है जो किसी भी बात का मूल है.

“एक जटा” का तात्पर्य है केशो की एक वेणी. वेणी, केशो के तीन भागो से बनती है और ये तीन भाग तीन तत्वों के प्रतीक है.. अगर “केश” शब्द का संधि विच्छेद करे तो, क् अ श्.... ‘क्’ ब्रम्हा के लिए, अ विष्णु और श महेश के लिये उपयोग किया है. ये तीनो क्रमशः तीन तत्वों को दर्शाते है सत्, रज और तम गुण..और केशो से इन तीनो गुणों का बोध होता है. और जिनके ये केश है वो हो भगवती तारा है जिन्की तीन तत्वों से बनी वेणी है आर जिए नाम दिया है एक जटा तारा. जिस भगवती ने इन तीन गुणों से निर्मित वेणी धारण की है वह अपने आप में कितनी शक्तिमान क्रियमान होंगी इसका अनुमान लगाना अचिन्त्य है.. जो इन तीन भावो को नियंत्रण किये हुए है अर्थात ये तीनो तत्व इनके अधीन है और एक जाटा में ही बंधे हुए समाहित होकर अभेद्त्व का प्रतीक है...जो अभय प्रदान करने वाली है और भय का नाश करने वाली है. जटा का दुसरा तात्पर्य इंगित करता है तपश्चर्या से. जितना आपका तप बढते जाता है उतनी आपकी जटा लंबी होती जाती है इसलिए साधु, संतो, महयोगियो की जटाए लंबी होती है.

वशीकरण के लिये एकजटा साधना मन्त्र

  • ॥ॐ ह्रीं नमो भगवती एकजटे मम् वज पुष्पम् प्रतीच्छ स्वाहा॥
  • OM HREEM NAMO EKAJATE MAM VAJ PUSHAM PRATTTCHCHH SVAAHAA

वशीकरण के लिये एकजटा साधना सामग्री

  • सिद्ध एकजटा यंत्र
  • सिद्ध एकजटा माला
  • सिद्ध आसन
  • रक्षासुत्र
  • एकजटा कवच
  • एकजटा गुटिका
  • एकजटा वशीकरण साधना की संपूर्ण विधि

उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये विद्यारत्न साधना मुहुर्त

  • दिन- मंगलवार, अमावस्या
  • समय- रात ९ के बाद
  • दिशा- दक्षिण
  • साधना अवधि- ११ दिन
  • माला मन्त्र- ११ माला रोज
  • साधना स्थल- शांत कमरा, किसी भी सूनसान व शांत जगह पर, पूजा घर

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