Maata Bagalamukhi Shivir

June 12, 2013

माता बगलामुखी साधना शिविर

१६ जून २०१३ सुबह ११ से शाम ६ बजे तक

Agrasen Bhuvan, 90 feet Rd, Ghatkoper E mUMBAI

माता बगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं. इन्हें माता पीताम्बरा माता भी कहते हैं. ये स्तम्भन, शत्रु मुक्ति की देवी हैं. सारे ब्रह्माण्ड की शक्ति मिल कर भी इनका मुकाबला नहीं कर सकती. शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है. इनकी उपासना से शत्रुओं का स्तम्भन होता है तथा मानव का जीवन निष्कंटक हो जाता है.देवी बगलामुखी जी के संदर्भ में एक कथा बहुत प्रचलित है जिसके अनुसार एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच जाता है और अनेकों लोक संकट में पड़ गए और संसार की रक्षा करना असंभव हो गया. यह तूफान सब कुछ नष्ट भ्रष्ट करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था, जिसे देख कर भगवान विष्णु जी चिंतित हो गए.

इस समस्या का कोई हल न पा कर वह भगवान शिव को स्मरण करने लगे तब भगवान शिव उनसे कहते हैं कि शक्ति के अतिरिक्त अन्य कोई इस विनाश को रोक नहीं सकता अत: आप उनकी शरण में जाएँ, तब भगवान विष्णु ने हरिद्रा सरोवर के निकट पहुँच कर कठोर तप करते हैं. भगवान विष्णु ने तप करके महात्रिपुरसुंदरी को प्रसन्न किया देवी शक्ति उनकी साधना से प्रसन्न हुई और सौराष्ट्र क्षेत्र की हरिद्रा झील में जलक्रीडा करती महापीत देवी के हृदय से दिव्य तेज उत्पन्न हुआ.

उस समय चतुर्दशी की रात्रि को देवी बगलामुखी के रूप में प्रकट हुई, त्र्येलोक्य स्तम्भिनी महाविद्या भगवती बगलामुखी नें प्रसन्न हो कर विष्णु जी को इच्छित वर दिया और तब सृष्टि का विनाश रूक सका. देवी बगलामुखी को बीर रति भी कहा जाता है क्योंकि देवी स्वम ब्रह्मास्त्र रूपिणी हैं, इनके शिव को एकवक्त्र महारुद्र कहा जाता है इसी लिए देवी सिद्ध विद्या हैं. तांत्रिक इन्हें स्तंभन की देवी मानते हैं, गृहस्थों व्यक्तियो के लिए बगलामुखी देवी समस्त प्रकार के संशयों का शमन करने वाली हैं.

आप का विरोधी अथवा शत्रु आपको अन्यायपूर्वक ढंग से तंग कर रहा हो अथवा राजकीय रुकावटों के कारण प्रोमोशन न मिल रहा हो, व्यवसाय में गुप्त शत्रु हानि पहुंचाने का यत्न करते हों या आपको अनावश्यक रूप से झगड़े में फंसाया जा रहा हो तो श्री बगलामुखी जी का जप सहायक सिद्ध होता है।

करीब १५ वर्ष बाद यह साधना आयोजित की जा रही है.

यह साधना राजनीति से जुडे लोगो के लिये अति उत्तम है

जमीन-जायदाद से जुडे वाद-विवाद मे लाभ मिलता है.

छुपे शत्रुओ से शांती मिलनी शुरु हो जाती है.

शत्रु के द्वारा किये गये आपके खिलाफ षडयंत्र शांत होने लगते है.