Karna pishachini sadhana vidhi

May 4, 2017

कर्ण पिशाचिनी साधना

भूतकाल-वर्तमान काल की घटना को जाने!

रहस्यमयी कर्ण पिशाचिनी विद्या- एक ऐसी विद्या जिसकी सिद्धी कर ली जाय तो सामने वाले ब्यक्ति का भूतकाल व वर्तमान काल को जाना जा सकता है. यह एक ऐसी साधना है जिसे सिद्ध करने के लिये हर क्षेत्र के लोग लालायित रहते है. इसकी साधना दो पद्धति से की जाती है, पहला है तंत्र मार्ग से तथा दूसरा है वाम मार्ग से.

एक आम ब्यक्ति चाहे वह ग्रहस्थ हो या किसी भी क्षेत्र से जुडा हो तंत्र मार्ग से कर्ण पिशाचिनी साधना कर सकता है. और वाम मार्ग से कर्ण पिशाचिनी की साधना करना सिर्फ औघड यानी अघोरियो को ही इजाजत होती है. एक आम ब्यक्ति वाम मार्ग से साधना नही कर सकता. वह तभी साधना कर सकता जब वह ग्रहस्थ जीवन का त्याग कर चुका हो. और उसे वाम मार्ग की दिक्षा मिली हो.

तो आज हम बात करेगे तंत्र मार्ग की..... लोगो के मन मे कर्ण-पिशाचिनी के प्रति बेहद डर की भावना भरी हुयी है कि उन्हे कही कोई नुकसान न हो जाये. . लेकिन सही मार्ग-दर्शन मे, गुरु के दिशा-निर्देश मे यह साधना की जाय तो बिना नुकसान के सफलता भी मिल जाती है. योग्य गुरु कर्ण-पिशाचिनी के मंत्र मे विशिष्ठ बीज मंत्र मिलाकर देते है जिससे इससे नुकसान की संभावना समाप्त हो जाती है. यह साधना पारलौकिक शक्तियों को अपने वश में करने के लिये जानी जाती है. इस साधना के द्वारा ब्यक्ति की बहुत ही ब्यक्तिगत जानकारी भी हासिल की जा सकती है, इसलिये साधक को गुरु से कर्ण-पिशाचिनी साधना की संपूर्ण विधि को समझकर ही साधना की शुरुवात करनी चाहिये.

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आईये अब जानते है कि कर्ण-पिशाचिनी साधना के लिये क्या करे या क्या न करे.

  • सबसे पहले कर्ण-पिशाचिनी साधना की दिक्षा किसी योग्य जानकार ब्यक्ति से लेनी चाहिये, जिससे कि आप उनके मार्ग-दर्शन मे साधना संपन्न कर सके.
  • साधना काल मे स्त्री से संबंध न रखे. यानी पूर्ण ब्रम्हचर्य रखे.
  • इस साधना को स्त्री और पुरुष दोनो ही कर सकते है.
  • साधना काल मे तीखी-मिर्च-मसालो को अपने भोजन से दूर रखे.
  • ब्यसन-धूम्रपान तथा मद्यपान से दूर रहे.
  • साधना के दौरान मांसाहारी भोजन से दूर रहे.
  • स्त्रियो के लिये मासिक-धर्म के दौरान साधना वर्जित है इसलिये ३ दिन साधना रोककर चौथे दिन से साधना शुरु करे.
  • याद रखे इस कर्ण-पिशाचि्नी साधना को साधक देवी के रूप मे मानकर साधना करे.
  • इस साधना का समय सूरज डूबने के बाद का होता है.
  • जो साधना सामग्री का उपयोग कर रहे है, ध्यान रखे कि वह प्राणप्रतिष्ठित होनी चाहिये.
  • इस साधना मे यंत्र, माला, गुटिका, श्रंगार, आसन, कवच ईत्यादि का उपयोग किया जाता है.
  • यह साधना २१ से ४१ दिन की होती है.
  • नियमित व एक ही जगह पर साधना संपन्न करे, साधना की जगह को बदले नही.
  • इस साधना के प्रति अपनी पूरी श्रद्धा बनाये रखे.
  • इस साधना की जानकारी हमेशा गुप्त रखे.
  • आप इस साधना को नही मानते यह अच्छी बात है पर मजाक मे इस साधना को कभी न ले.
  • आप इस साधना के प्रति गंभीर हो तभी इस साधना की तरफ बढे.
  • इस साधना का उपयोग गलत नीयत से कभी न करे.

यह साधना वही ब्यक्ति कर सकता है जो निडर हो और गंभीरता से साधना करना चाह रहा हो. नीचे डिस्क्रिप्शन मे इस साधना की सामग्री का लिंक दिया गया है, आशा है कि आप इस रहयमयी व अलौकिक साधना को सीखकर समाज मे अच्छे कार्य करेंग